होम डिलीवरी का दावा हवा: गैस एजेंसियों की मनमानी और प्रशासनिक चुप्पी से जनता बेहाल
📅 Published on: April 1, 2026
जिले की कई गैस एजेंसियों द्वारा होम डिलीवरी की बात मजबूती से रखते है लेकिन डिलीवरी एजेंसी से सटे किसी गांव या कस्बे के अंदर डिलीवरी कर दी जा रही है जिससे एजेंसी पर भीड़ न दिखे।
Kapilvastupost
बढ़नी/इटवा:
एक तरफ सरकार और प्रशासन डिजिटल इंडिया और पारदर्शी वितरण प्रणाली का दम भरते हैं, वहीं दूसरी ओर बढ़नी और इटवा क्षेत्र की जमीनी हकीकत इन दावों की धज्जियां उड़ा रही है। गैस एजेंसियों की मनमानी और स्थानीय प्रशासन की कथित “अक्षमता” के कारण आम उपभोक्ता आज दाने-दाने की तरह एक-एक सिलेंडर के लिए तरस रहा है।
होम डिलीवरी सिर्फ कागजों पर, गोदामों पर जंग जैसे हालात
नियमों के मुताबिक उपभोक्ताओं को उनके घर पर सिलेंडर मिलना चाहिए, लेकिन हकीकत में ऑनलाइन बुकिंग केवल एक ‘छलावा’ बनकर रह गई है। मंगलवार को जनपद के अधिकतर गैस एजेंसी पर लंबी लंबी लाइनों का रेला लगा रहा, वह प्रशासनिक विफलता का जीता-जागता सबूत था। घंटों इंतजार के बाद उपभोक्ताओं को बताया गया कि सिलेंडर घर नहीं, बल्कि गोदाम से लाइन लगाकर मिलेगा। इसके बाद जो अफरा-तफरी मची, उसने बुजुर्गों और महिलाओं को भी कतारों में लगने पर मजबूर कर दिया।
आपदा में अवसर: ₹2000 तक पहुंच रही कीमत
मिडिल ईस्ट के युद्ध और संभावित ईंधन संकट के डर को एजेंसियों ने ‘कालाबाजारी’ का हथियार बना लिया है। बढ़नी निवासी विजय उपाध्याय का आरोप है कि जहां एक ओर एजेंसियां स्टॉक की कमी का रोना रोती हैं, वहीं दूसरी ओर ₹1800 से ₹2000 के बीच ऊंचे दामों पर सिलेंडरों की कालाबाजारी धड़ल्ले से जारी है। हर दूसरे दिन ट्रक आने के बावजूद आम आदमी खाली हाथ लौट रहा है।
प्रशासनिक अक्षमता की पराकाष्ठा
सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की कार्यशैली पर उठता है। जब जनता सड़कों पर है और कालाबाजारी खुलेआम हो रही है, तब अधिकारी ‘सब ठीक है’ का रटा-रटाया जवाब देकर पल्ला झाड़ रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की यह चुप्पी सीधे तौर पर एजेंसी संचालकों को संरक्षण देने जैसी प्रतीत होती है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि हमें डिजिटल बुकिंग का झुनझुना नहीं, घर पर गैस चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि वह एसी कमरों से बाहर निकलकर गोदामों की जांच करे और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करे।
बताते चलें कि जब तक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की जाती और होम डिलीवरी के वादे को सख्ती से लागू नहीं कराया जाता, तब तक आम जनता इसी तरह अव्यवस्था की भेंट चढ़ती रहेगी।


