“डॉक्टर ऑफ द मंथ: चालीस की उम्र के बाद क्यों भारी पड़ रही हैं आपकी सांसें? विशेषज्ञ डॉ. संदीप राव से समझें कारण और समाधान”

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली और बढ़ते प्रदूषण के बीच, सीढ़ियां चढ़ते समय दम फूलना या रात को अचानक सांस की कमी से नींद खुलना एक आम समस्या बनती जा रही है। अक्सर हम इसे सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह शरीर के भीतर छिपी किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।

इसी महत्वपूर्ण विषय पर गहराई से चर्चा करने के लिए ‘डॉक्टर ऑफ द मंथ’ सीरीज में आज हमारे साथ हैं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. संदीप कुमार राव। (MD)डॉक्टर राव जिले के मशहूर V P L हॉस्पिटल पर अपनी सेवाएं देते हैं | डॉक्टर साहब, आपका स्वागत है। आज हम एक ऐसी समस्या पर बात करेंगे जो अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं या फिर बहुत ज्यादा डर जाते हैं—वह है ‘सांस फूलना’।


प्रश्न 1: डॉक्टर साहब, सबसे पहले यह बताएं कि ‘सांस फूलना’ असल में क्या है? क्या यह हमेशा फेफड़ों की बीमारी का संकेत होता है?

डॉ. संदीप कुमार राव: देखिए, मेडिकल भाषा में इसे ‘डिस्पनिया’ (Dyspnea) कहते हैं। सरल शब्दों में, जब व्यक्ति को महसूस हो कि उसे पर्याप्त हवा नहीं मिल रही है या उसे सांस लेने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है, तो इसे सांस फूलना कहते हैं।

यह केवल फेफड़ों की समस्या नहीं है। सांस फूलने के पीछे मुख्य रूप से तीन अंग जिम्मेदार हो सकते हैं:

फेफड़े (Lungs): जैसे अस्थमा, COPD या निमोनिया।

दिल (Heart): हार्ट फेलियर या ब्लॉकेज के कारण फेफड़ों में पानी जमा होना।

खून (Blood): शरीर में खून की भारी कमी (Anemia) होना।

प्रश्न 2: एक आम आदमी कैसे पहचाने कि उसकी सांस फूलना सामान्य है या गंभीर?

डॉ. संदीप कुमार राव: अगर आप भारी काम कर रहे हैं, दौड़ रहे हैं या सीढ़ियां चढ़ रहे हैं और सांस फूलती है, तो यह सामान्य है। लेकिन चेतावनी के संकेत (Red Flags) तब हैं जब:

बैठे-बैठे या आराम करते समय सांस फूले।

रात को सोते समय अचानक सांस फूलने से नींद खुल जाए।

सांस के साथ ‘सीटी’ जैसी आवाज (Wheezing) आए।

छाती में दर्द या भारीपन महसूस हो।

प्रश्न: डॉ. साहब, अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि दो मंजिल सीढ़ियां चढ़ते ही उनका दम फूलने लगता है। क्या यह सिर्फ कमजोरी है?

डॉ. संदीप राव: देखिए, अगर कोई व्यक्ति सालों से एक्सरसाइज नहीं कर रहा है, तो थोड़ी सांस फूलना सामान्य है। लेकिन अगर पहले आप आसानी से सीढ़ियां चढ़ लेते थे और अब अचानक दिक्कत होने लगी है, तो यह ‘एक्सर्शनल डिस्पनिया’ है।

प्रश्न: कई मरीजों को रात में अचानक सांस फूलने की वजह से उठकर बैठना पड़ता है। यह स्थिति कितनी गंभीर है?

डॉ. संदीप राव: यह एक गंभीर संकेत है। मेडिकल भाषा में इसे PND कहते हैं। मरीज लेटा होता है और अचानक उसे लगता है कि उसका दम घुट रहा है। खिड़की खोलनी पड़ती है या दो-तीन तकिए लगाकर बैठना पड़ता है।

मुख्य कारण: इसका सबसे बड़ा कारण हार्ट फेलियर (Left-sided Heart Failure) होता है। लेटने पर शरीर का तरल पदार्थ (Fluid) फेफड़ों में जमा होने लगता है, जिसे ‘पल्मोनरी एडिमा’ कहते हैं।

स्लीप एपनिया: कुछ लोगों में खर्राटों के साथ सांस रुकने की समस्या भी होती है।

प्रश्न 3: आजकल युवाओं में भी यह समस्या देखी जा रही है। इसके पीछे क्या मुख्य कारण हो सकते हैं?

डॉ. संदीप कुमार राव: युवाओं में इसके तीन प्रमुख कारण सामने आ रहे हैं:

लाइफस्टाइल और मोटापा: वजन बढ़ने से फेफड़ों पर दबाव पड़ता है।

प्रदूषण और धूम्रपान: वेपिंग और सिगरेट फेफड़ों की क्षमता घटा रहे हैं।

एंग्जायटी (Panic Attack): मानसिक तनाव के कारण भी कई बार अचानक सांस फूलने लगती है, जिसे लोग दिल की बीमारी समझ लेते हैं।

प्रश्न 4: जांच के लिए कौन-कौन से टेस्ट जरूरी होते हैं?

डॉ. संदीप कुमार राव: हम स्टेप-बाय-स्टेप चलते हैं:

सबसे पहले Physical Examination और ऑक्सीजन लेवल (SPO2) चेक किया जाता है।

Chest X-ray: फेफड़ों की स्थिति देखने के लिए।

ECG और Echo: यह देखने के लिए कि कहीं हृदय की मांसपेशियों में कमजोरी तो नहीं।

PFT (Pulmonary Function Test): फेफड़ों की हवा सोखने की क्षमता मापने के लिए।

CBC: हीमोग्लोबिन चेक करने के लिए।

प्रश्न 5: क्या खान-पान या घरेलू नुस्खों से इसे ठीक किया जा सकता है?

डॉ. संदीप कुमार राव: घरेलू नुस्खे ‘सपोर्ट’ कर सकते हैं, ‘इलाज’ नहीं। अगर समस्या एलर्जी की है, तो भाप लेना (Steam) या शहद-अदरक फायदेमंद हो सकता है। लेकिन अगर कारण हार्ट या गंभीर इन्फेक्शन है, तो केवल डॉक्टर की सलाह ही काम आएगी। मैं सलाह दूंगा कि नमक का सेवन कम करें (अगर हार्ट की समस्या है) और प्राणायाम या ब्रीदिंग एक्सरसाइज नियमित करें।

प्रश्न 6: अंत में, हमारे दर्शकों के लिए आपका क्या संदेश है?

डॉ. संदीप कुमार राव: सांस फूलना कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक ‘लक्षण’ है। इसे दबाएं नहीं। अगर आप इनहेलर का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उसे शर्मिंदगी न समझें, वह आपके फेफड़ों का मित्र है।रोज कम से कम तीस मिनट तेज क़दमों के साथ पैदल जरूर चलें , प्रदूषण से बचें, मास्क लगाएं और साल में एक बार अपना बेसिक हेल्थ चेकअप जरूर कराएं।