📅 Published on: April 29, 2026
निज़ाम अंसारी
सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश सरकार की ‘स्वच्छ भारत मिशन’ योजना को जमीनी स्तर पर पलीता लगाया जा रहा है। जनपद के बांसी विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत भवांरी में सरकारी धन के बंदरबांट का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। यहाँ लाखों की लागत से बना एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र (ISWM) अपनी उपयोगिता सिद्ध करने के बजाय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता का स्मारक बनकर रह गया है।
कागजों पर स्वच्छता, जमीन पर गंदगी का अंबार
लगभग 2-3 वर्ष पूर्व इस केंद्र का निर्माण बड़े तामझाम के साथ किया गया था ताकि गांव को कूड़ा मुक्त बनाया जा सके। विडंबना यह है कि निर्माण के बाद से ही इस केंद्र के गेट पर ताला लटका हुआ है। जहाँ एक ओर सरकार गांवों में सफाई के लिए बजट जारी कर रही है, वहीं भवांरी में स्थिति इसके उलट है। गांव का सारा कचरा निस्तारण केंद्र तक पहुँचने के बजाय सड़कों और नालियों के किनारे फेंका जा रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
घटिया निर्माण और वित्तीय अनियमितता के आरोप
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इस केंद्र के निर्माण में मानकों की जमकर अनदेखी की गई। घटिया निर्माण सामग्री के कारण यह केंद्र संचालन से पहले ही जर्जर दिखने लगा है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि केंद्र के नाम पर आए सरकारी बजट को जिम्मेदार अधिकारियों और ग्राम प्रधान ने मिलीभगत कर आपस में बांट लिया।
प्रशासनिक चुप्पी पर उठते सवाल
हैरानी की बात यह है कि पूर्व में भी इस भ्रष्टाचार की कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन जिले के उच्चाधिकारियों ने इस ओर आँखें मूंद रखी हैं। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी जनता को इसका लाभ न मिलना प्रशासन की कार्यशैली पर बड़े सवालिया निशान खड़े करता है। अब देखना यह है कि क्या खबर प्रकाशित होने के बाद जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद से जागेंगे या भ्रष्टाचार का यह खेल यूँ ही जारी रहेगा।