📅 Published on: May 1, 2026
गुरु जी की कलम से
सिद्धार्थनगर:** तहसील बांसी के खेसरहा में तैनात नायब तहसीलदार माधुर्य यादव मुश्किलों में घिर गए हैं। वरासत वाद के निस्तारण के बदले कथित तौर पर रिश्वत लेने के मामले में जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने कड़ा रुख अपनाते हुए उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम टीकुर निवासी ओम प्रकाश चौधरी ने शपथ पत्र के माध्यम से शिकायत की थी कि उनके वरासत वाद (संख्या: 202217630202990) को सुलझाने के लिए नायब तहसीलदार ने अपने कथित निजी मुंशी जमाल के जरिए तीन किश्तों में कुल **30 हजार रुपये** लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पत्नी के जेवर और गेहूं बेचकर यह रकम जुटाई गई थी, लेकिन इसके बावजूद काम नहीं हुआ और अतिरिक्त पैसों की मांग की गई।
जांच में खुले राज
एसडीएम इटवा कुणाल द्वारा की गई जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:
कॉल लॉग से पुष्टि: शिकायतकर्ता और कथित मुंशी जमाल के बीच लगातार संपर्क की पुष्टि कॉल डिटेल्स से हुई है।
* **संदिग्ध मुंशी:** जिस व्यक्ति को अधिवक्ता का मुंशी बताया गया, संबंधित अधिवक्ता उस वाद में शामिल ही नहीं थे।
* **कारण बताओ:** वर्ष 2022 से लंबित इस वाद के निस्तारण में देरी का कोई ठोस आधार नायब तहसीलदार पेश नहीं कर सके।
प्रशासनिक रुख
हालांकि नायब तहसीलदार माधुर्य यादव ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है, लेकिन एसडीएम की जांच रिपोर्ट में उनकी कार्यशैली को प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाया गया है। इसी आधार पर डीएम ने शासन को दंडात्मक कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेज दी है।