📅 Published on: July 9, 2026
गुरु जी की कलम से
**बढ़नी (सिद्धार्थनगर)।** विकास खंड बढ़नी क्षेत्र में सरकारी दावों की हवा निकालते हुए छुट्टा पशु स्थानीय लोगों के लिए जानलेवा मुसीबत बन चुके हैं। क्षेत्र में कई गौशालाएं संचालित होने के बावजूद आवारा मवेशी सड़कों और खेतों में खुलेआम घूम रहे हैं। ये जानवर जहाँ एक तरफ किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राहगीरों के लिए काल साबित हो रहे हैं। ताजा मामला बढ़नी क्षेत्र का है, जहाँ एक छुट्टा सांड के हमले में घायल बुजुर्ग की इलाज के दौरान दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद से स्थानीय जिम्मेदार अधिकारी सवालों के घेरे में हैं और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
**सांड के हमले के बाद कोमा में चले गए थे बुजुर्ग**
मिली जानकारी के अनुसार, बीते 12 जून की शाम बढ़नी क्षेत्र के खुरुहुरिया गांव के रहने वाले बुजुर्ग विरसेन चौधरी पर एक आवारा सांड ने जानलेवा हमला कर दिया था। इस हमले में वह गंभीर रूप से चोटहिल हो गए थे। परिजनों ने उन्हें तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) बढ़नी पहुँचाया, जहाँ डॉ. प्रदीप वर्मा ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी नाजुक हालत को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
स्थिति में सुधार न होने पर उन्हें लखनऊ के केजीएमसी (KGMC) ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहाँ सिर का ऑपरेशन हुआ। करीब 10 दिन बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई, लेकिन घर आने के चार दिन बाद अचानक उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई। उन्हें दोबारा अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों की लाख कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका और इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
**जिले के सबसे छोटे गांव के इकलौते निवासी थे विरसेन चौधरी**
ग्राम पंचायत खुरहुरिया के पूर्व ग्राम प्रधान अनुज कुमार उर्फ गोलू चौधरी ने दुख व्यक्त करते हुए बताया कि मृतक विरसेन चौधरी (जो रिश्ते में उनके बाबा लगते थे) सिद्धार्थनगर जिले के इतिहास के सबसे छोटे गांव **’शिवपुर उर्फ लंगडी’** के इकलौते निवासी थे। इस पूरे गांव में सिर्फ उनका एक ही घर है। सांड के हमले में सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण वे कोमा में चले गए थे और 7 जुलाई को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी मौत की खबर से पूरे क्षेत्र की आँखें नम हैं।
**परिजनों और ग्रामीणों ने की सख्त कार्रवाई की मांग**
मृतक के पुत्र राकेश चौधरी ने सुबकते हुए कहा, *”जिस तरह मेरे पिता की दर्दनाक मौत हुई है, भगवान ऐसा किसी के साथ न करे। जिम्मेदार अधिकारियों को सोते से जागना चाहिए और इन छुट्टा जानवरों को पकड़वा कर गौशाला भिजवाना चाहिए।”*
वहीं, पीएचसी बढ़नी के डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि बुजुर्ग के दिमाग में गंभीर चोट आने के कारण वे कोमा में चले गए थे, जिसके बाद उन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया था। उनका निधन अत्यंत दुखद है। स्थानीय जनता ने अब प्रशासन से लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और क्षेत्र को छुट्टा पशुओं से मुक्त कराने की मांग की है।