सिद्धार्थनगर: ‘कागजों पर डिलीवर्ड, हकीकत में सिर्फ पर्ची!’… युग कृष्णा इण्डेन गैस एजेंसी की दबंगई से बढ़नी की जनता बेहाल, सो रहा प्रशासन**

गुरु जी की कलम से
**बढ़नी, सिद्धार्थनगर।**
डिजिटल इंडिया और सुशासन के दावों के बीच सिद्धार्थनगर के नगर पंचायत बढ़नी से एक ऐसा काला सच सामने आया है, जो सीधे तौर पर गरीबों के हक पर डाका डाल रहा है। यहाँ स्थित **युग कृष्णा इण्डेन गैस एजेंसी** की मनमानी और सरेआम अवैध वसूली से स्थानीय जनता त्रस्त हो चुकी है। हालात ये हैं कि गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी तो दूर की बात है, उपभोक्ताओं को कड़ाके की धूप और ठंड में घंटों लंबी लाइनों में लगकर सिर्फ ‘धक्का-मुक्की’ नसीब हो रही है। हैरान करने वाली बात यह है कि जनता की इस बेबसी पर जिला प्रशासन, जिलापूर्ति विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है।
**खेल समझिए: मोबाइल पर ‘डिलीवर्ड’ का मैसेज, हाथ में सिर्फ कोरी पर्ची!**
एजेंसी के भीतर चल रहा खेल बेहद शातिराना है। वर्तमान में उपभोक्ताओं को धड़ल्ले से पर्ची तो बांट दी जाती है और उनके मोबाइल पर DAC (डिलिवरी ऑथेंटिकेशन कोड) आते ही ‘सिलेंडर डिलीवर्ड’ का मैसेज भी फ्लैश हो जाता है। सरकारी कागजों और डिजिटल रिकॉर्ड में उपभोक्ता को गैस मिल चुकी होती है, लेकिन हकीकत में उपभोक्ता के हाथ में होती है सिर्फ एक पर्ची! इस पर्ची को लेकर उपभोक्ता 15-15 दिनों तक भटकने को मजबूर है कि उसे वास्तव में गैस कब मिलेगी। यह सीधे तौर पर एक बड़ा डिजिटल घोटाला है, जो अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहा है।
**होम डिलीवरी ठप, पर वसूली पूरी: लाखों के ‘ओवर रेटिंग’ का गंदा खेल**
ईरान-अमेरिका विवाद के समय से शुरू हुई गैस की किल्लत आज भी बढ़नी में कृत्रिम रूप से बरकरार रखी गई है। नियमतः गैस की होम डिलीवरी अनिवार्य है, जिसके लिए सरकार ने दरें तय की हैं। वर्तमान में होम डिलीवरी चार्ज सहित सिलेंडर की कीमत **1021 रुपये** है, लेकिन एजेंसी संचालक बिना होम डिलीवरी दिए, सरेआम गोदाम या काउंटर से ही **1030 रुपये** वसूल रहा है।
**अवैध कमाई का गणित:** प्रति सिलेंडर 9 रुपये की यह अवैध वसूली छोटी लग सकती है, लेकिन जब इस एजेंसी के **18,000 एक्टिव कनेक्शन धारकों** से इसे जोड़ा जाए, तो यह हर महीने लाखों रुपये की अवैध काली कमाई का जरिया बन जाता है। चर्चाओं का बाजार गर्म है कि इसी मोटी काली कमाई को बचाए रखने के लिए होम डिलीवरी की प्रक्रिया को जानबूझकर शुरू नहीं किया जा रहा है। इससे पहले भी 992 रुपये के सिलेंडर के बदले चुपचाप 1000 रुपये (8 रुपये अतिरिक्त) वसूले जा रहे थे।
जिलापूर्ति अधिकारी क्यों हैं मौन?**
इस खुली लूट को लेकर क्षेत्र के दर्जनों बुद्धिजीवियों और संभ्रांत नागरिकों ने क्षेत्रीय सांसद, विधायक, DM, चेयरमैन और जिलापूर्ति अधिकारी (DSO) का ध्यान कई बार आकृष्ट कराया है। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर अधिकारियों का हंटर इस भ्रष्ट तंत्र पर क्यों नहीं चल रहा? क्या विभाग किसी बड़े आंदोलन का इंतजार कर रहा है या फिर इस अवैध कमाई के तार ऊपर तक जुड़े हैं?
क्षेत्रीय जनता ने अब साफ चेतावनी दे दी है कि यदि ओवर रेटिंग करने वाली इस एजेंसी के खिलाफ विधिक कार्रवाई नहीं हुई और होम डिलीवरी सुचारू रूप से शुरू नहीं की गई, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
*(नोट: इस पूरे मामले पर पक्ष जानने के लिए एजेंसी संचालक डॉ. रवि श्रीवास्तव से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन हमेशा की तरह उनका फोन अनुत्तरित रहा या उन्होंने बात करना मुनासिब नहीं समझा।