रसूलपुर में कूड़े का अंबार: दुर्गंध से बढ़ा बीमारियों का खतरा, समाजसेवी राम वृक्ष गुप्ता ने CM योगी और DM से की कार्रवाई की मांग

Kapilvastupost

सिद्धार्थनगर। इटवा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत रसूलपुर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। गांव में जगह-जगह लगे कूड़े के अंबार के कारण ग्रामीणों का जीना दुश्वार हो गया है। लंबे समय से पड़े कचरे से उठती असहनीय दुर्गंध ने पूरे इलाके को गंदगी की चपेट में ले लिया है, जिससे गांव में संक्रामक बीमारियों के फैलने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

लाखों के कूड़ा घर शो-पीस, सफाई व्यवस्था बदहाल ग्रामीणों का कहना है कि कचरा प्रबंधन के नाम पर सरकार द्वारा लाखों रुपये की लागत से कूड़ा घर (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर) का निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन नियमित कचरा उठान और निस्तारण की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई। जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते अब यह कूड़ा सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर फैल रहा है।

राम वृक्ष गुप्ता ने उठाई सख्त कार्रवाई की मांग मामले की गंभीरता को देखते हुए ‘नव युवक ग्राम विकास समिति’ के संरक्षक एवं समाजसेवी राम वृक्ष गुप्ता ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सिद्धार्थनगर के जिलाधिकारी से लिखित शिकायत की है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।

“स्वच्छता केवल कागजी दावा या प्रशासन का औपचारिक काम नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है। गांवों में सफाई व्यवस्था नियमित और पारदर्शी होनी चाहिए ताकि आम जनता को बीमारियों के साये में न जीना पड़े।” — राम वृक्ष गुप्ता, समाजसेवी

प्रशासन से की गई मुख्य मांगें:

  • तत्काल निरीक्षण: संबंधित विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लें।

  • त्वरित सफाई: गांव में जमा पूरे कचरे को अविलंब हटाकर सैनिटाइजेशन कराया जाए।

  • स्थाई व्यवस्था: कूड़ा निस्तारण केंद्र को क्रियाशील कर दैनिक कचरा उठान की सुनिश्चित व्यवस्था बने।

जनहित में बड़ा सवाल: जब सरकार द्वारा कूड़ा निस्तारण और ग्रामीण स्वच्छता के लिए लाखों रुपये का फंड आवंटित किया गया है, तो फिर रसूलपुर गांव में कचरे का यह अंबार क्यों? क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या ग्रामीण ऐसे ही दुर्गंध और बीमारियों के बीच रहने को मजबूर रहेंगे?