📅 Published on: August 29, 2026
गोरखपुर का रवीश कुमार अब भी लापता, महराजगंज के दो लोगों की भी तलाश की जानकारी; नेपाल से बहकर गंडक में पहुंच रहे शव, भारत ने भेजी राहत और विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम
निजाम अंसारी
नई दिल्ली/काठमांडू/गोरखपुर। नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने हिमालयी क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र में आई अचानक बाढ़ और मलबे के सैलाब ने गांवों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। सबसे बड़ी चिंता नेपाल में मौजूद भारतीय नागरिकों को लेकर है। विदेश मंत्रालय के ताजा अपडेट के मुताबिक करीब 320 भारतीय नागरिक अभी संपर्क से बाहर हैं, जबकि राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।
84 भारतीय सुरक्षित निकाले गए
विदेश मंत्रालय के अनुसार अब तक 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इनमें त्रिशूली-I जलविद्युत परियोजना में काम करने वाले 63 कर्मचारी और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से निकाले गए तमिलनाडु के 21 नागरिक शामिल हैं। तमिलनाडु के 21 नागरिकों को 28 अगस्त को दिल्ली लाया गया।
इसके अलावा चीन की तरफ फंसे भारतीयों के लिए भी बड़ी राहत की खबर है। 149 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से चीन से नेपाल पहुंच चुके हैं, जबकि करीब 400 भारतीय चीन की तरफ सुरक्षित हैं और भारतीय दूतावास उनके संपर्क में है। इन आंकड़ों को नेपाल में लापता भारतीयों के आंकड़े में सीधे जोड़ना या घटाना उचित नहीं होगा, क्योंकि ये अलग-अलग समूह हैं।
भारतीयों के कौन-कौन से बड़े समूह प्रभावित?
MEA के शुरुआती विवरण में नेपाल में संपर्क से बाहर भारतीयों के पांच प्रमुख समूह सामने आए थे—त्रिशूली-I परियोजना के कर्मचारी, तमिलनाडु के कैलाश मानसरोवर यात्री, पश्चिम बंगाल के यात्री, अलग-अलग राज्यों के यात्री और केरल का एक समूह। शुरुआती सूची में कुल 288 लोगों का उल्लेख था, लेकिन बाद के अपडेट में संपर्क से बाहर भारतीयों की संख्या 320 बताई गई है।
राज्यवार सामने आई प्रमुख तस्वीर
महाराष्ट्र: 114 पर्यटकों/यात्रियों के फंसे होने की जानकारी सामने आई थी। इनमें 53 के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई थी, जबकि 61 से संपर्क नहीं हो पा रहा था।
पश्चिम बंगाल: शुरुआती तौर पर 32 लोगों का समूह संपर्क से बाहर बताया गया था; बाद के राज्य अपडेट में संख्या 39 तक बताई गई और दो लोगों से संपर्क होने की जानकारी सामने आई। इसलिए इस संख्या को अंतिम नहीं माना जाना चाहिए।
तमिलनाडु: दो समूहों में 37 और 49, यानी कुल 86 यात्रियों का उल्लेख हुआ था; बाद में 21 लोगों को सुरक्षित निकालकर दिल्ली लाया गया।
केरल: 33 भारतीयों का एक समूह शुरुआती MEA सूची में था।
कर्नाटक: 13 लोगों के प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई थी।
पूर्वांचल पर सबसे ज्यादा नजर
नेपाल की इस आपदा का असर भारत में सबसे पहले उत्तर प्रदेश के नेपाल सीमा से जुड़े जिलों में दिखाई दे रहा है। खास तौर पर गोरखपुर, महराजगंज और कुशीनगर में प्रशासन सतर्क है।
गोरखपुर का रवीश कुमार अब भी लापता
गोरखपुर के सहजनवां क्षेत्र के रामपुर धड़तौली गांव निवासी रवीश कुमार करीब छह महीने पहले नेपाल के त्रिशूली क्षेत्र में काम करने गए थे। उपलब्ध स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार वह वहां एक कंपनी में काम कर रहे थे। आपदा के बाद परिवार का उनसे संपर्क टूट गया और उनके भाई अजय कुमार ने प्रशासन को इसकी जानकारी दी। उनकी तलाश जारी है।
शुरुआत में गोरखपुर से तीन लोगों के लापता होने की सूचना सामने आई थी। बाद की जांच में आशुतोष मणि उपाध्याय और अभिजीत सिंह के सुरक्षित होने की पुष्टि हो गई। इस तरह उपलब्ध ताजा स्थानीय जानकारी के अनुसार गोरखपुर से सामने आए मामलों में एक व्यक्ति—रवीश कुमार—की तलाश जारी है।
महराजगंज के लोगों को लेकर भी चिंता
स्थानीय प्रशासन से संबंधित रिपोर्टों में नेपाल में मौजूद महराजगंज के राजकुमार गौतम और करण शर्मा के लापता होने की जानकारी सामने आई थी। राजकुमार गौतम सोनौली के बताए गए हैं, जबकि करण शर्मा कप्तानगंज, महराजगंज के निवासी बताए गए हैं और त्रिशूली क्षेत्र में काम करते थे। इन मामलों की ताजा स्थिति की आधिकारिक पुष्टि होने तक इन्हें “लापता/संपर्क से बाहर बताए गए” के रूप में ही रिपोर्ट किया जाना चाहिए।
नेपाल से बहकर यूपी पहुंच रहे शव
नेपाल की तबाही का सबसे भयावह असर नारायणी-गंडक नदी में दिखाई दे रहा है। बाढ़ के पानी के साथ मलबा, घरेलू सामान और शव भारत की ओर बहकर पहुंच रहे हैं।
29 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार महराजगंज और कुशीनगर में पिछले दो दिनों में कुल 10 शव बरामद किए जा चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार मृतकों की पहचान अभी नहीं हुई है और प्रारंभिक तौर पर उनके नेपाली नागरिक होने की आशंका जताई जा रही है। इसलिए इन शवों को नेपाल में लापता भारतीयों के शव मानना अभी सही नहीं होगा।
इससे पहले 28 अगस्त को दोनों जिलों में सात शव मिलने की रिपोर्ट सामने आई थी—महराजगंज और कुशीनगर में नदी किनारे शव बरामद हुए थे।
नेपाल में मौतों का आंकड़ा 600 के पार
आपदा की भयावहता लगातार बढ़ती जा रही है। ताजा रिपोर्टों में नेपाल में मृतकों की संख्या 626 और चीन के तिब्बत क्षेत्र में 7 बताई गई है। यानी नेपाल-तिब्बत आपदा में कुल मौतें 633 तक पहुंच गई हैं। करीब 3,000 लोग अभी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में 3,700 से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है, जबकि खराब मौसम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां राहत कार्य में बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
नेपाल में अब भी कई इलाकों में संचार व्यवस्था और सड़क संपर्क बाधित है। त्रिशूली-I परियोजना और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में सुरंगों तथा मलबे के भीतर फंसे लोगों की तलाश सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
भारत ने बढ़ाया राहत का हाथ
भारत ने नेपाल के लिए राहत सामग्री के साथ विशेषज्ञ टीम भी भेजी है। भारत की तीसरी सहायता उड़ान के साथ 11 सदस्यीय मेडिकल और टनल-रेस्क्यू टीम नेपाल पहुंच चुकी है। राहत सामग्री की खेप भी नेपाल को सौंपी गई है।
भारत का प्रयास अब सिर्फ राहत सामग्री भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि कठिन इलाकों में टनल रेस्क्यू, चिकित्सा सहायता और भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी पर भी केंद्रित है।
यूपी के लिए भी बढ़ा खतरा
नेपाल में बाढ़ के बाद नारायणी-गंडक नदी के जरिए उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में भी खतरा बढ़ा था। महराजगंज और कुशीनगर प्रशासन ने नदी के जलस्तर तथा बहाव पर निगरानी बढ़ाई। हालांकि गोरखपुर मंडल में बाद में नारायणी का जलस्तर सामान्य होने से तत्काल बाढ़ का खतरा कम होने की जानकारी सामने आई है।
फिलहाल नेपाल आपदा की सबसे महत्वपूर्ण तस्वीर
320 भारतीय — अभी संपर्क से बाहर
84 भारतीय — रेस्क्यू
63 भारतीय — त्रिशूली-I परियोजना से सुरक्षित निकाले गए
21 भारतीय — तमिलनाडु से रेस्क्यू होकर दिल्ली पहुंचे
149 भारतीय — चीन से सुरक्षित नेपाल पहुंचे
लगभग 400 भारतीय — चीन की तरफ सुरक्षित
गोरखपुर का रवीश कुमार — स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार तलाश जारी
महराजगंज के राजकुमार गौतम और करण शर्मा — संपर्क से बाहर बताए गए, ताजा पुष्टि का इंतजार
यूपी में 10 शव — महराजगंज और कुशीनगर में बरामद; पहचान की प्रक्रिया जारी
नेपाल में 626 मौतें — ताजा रिपोर्ट
नेपाल में करीब 3,000 लोग लापता — राहत एवं बचाव अभियान जारी