‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों की खुली पोल: सिद्धार्थनगर में जमीन पैमाइश के नाम पर रिश्वत लेती महिला लेखपाल का वीडियो वायरल
📅 Published on: October 10, 2026
शोहरतगढ़ तहसील का मामला: आवास के बरामदे में ही लिया चढ़ावा, उठने लगे प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल
Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर। प्रदेश सरकार एक तरफ जहां भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। जिले की शोहरतगढ़ तहसील अंतर्गत बॉर्डर इलाके में तैनात एक महिला लेखपाल का घूस लेते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो प्रशासनिक व्यवस्था और सरकार की कथनी-करनी के बीच के अंतर को साफ बयां कर रहा है।
बरामदे में बैठकर तय हुआ ‘सौदा’
वायरल वीडियो 19 सेकेंड का बताया जा रहा है, जिसमें महिला लेखपाल तहसील परिसर स्थित अपने आवास के बरामदे में बैठी नजर आ रही हैं। उनके हाथ में नक्शा और जमीन से जुड़े दस्तावेज हैं। सामने पैमाइश की गुहार लेकर पहुंचा एक पीड़ित किसान परिवार बैठा हुआ है। बातचीत के दौरान ही महिला लेखपाल बड़ी बेफिक्री से पैमाइश कराने के बदले रुपये लेती दिखाई दे रही हैं।
बताया जा रहा है कि संबंधित लेखपाल के पास बॉर्डर इलाके के तीन गांवों की जिम्मेदारी है—जिनमें आय, निवास प्रमाण पत्र की आख्या (रिपोर्ट) लगाने से लेकर भूमि विवादों का निस्तारण शामिल है।
तहसील प्रशासन की किरकिरी, सरकार के दावों पर उठे सवाल
इस वीडियो के सामने आते ही शोहरतगढ़ तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों और किसान संगठनों का कहना है कि:
प्रशासनिक शह: तहसील परिसर के अंदर ही आवास पर बेखौफ होकर घूस लिया जाना यह दर्शाता है कि मातहतों को वरिष्ठ अधिकारियों का कोई खौफ नहीं है।
किसान परेशान: आम किसान अपनी ही जमीन की पक्की पैमाइश कराने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं और बिना ‘चढ़ावे’ के कोई फाइल आगे नहीं खिसकती।
खोखले दावे: प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार-मुक्त शासन की नीति ज़मीनी स्तर पर पूरी तरह विफल साबित हो रही है।
जांच के भरोसे प्रशासन
मामला तूल पकड़ते ही प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो का संज्ञान लिया जा रहा है और जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी व नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना यह होगा कि क्या केवल जांच के नाम पर मामले को लीपापोती कर शांत करा दिया जाएगा या फिर पीड़ित किसान को न्याय और दोषी लेखपाल पर ठोस कार्रवाई होगी?
प्रतीकात्मक फोटो


