सिद्धार्थनगर: भनवापुर फर्जी शिक्षक भर्ती प्रकरण में बड़ी कार्रवाई, अब नए सिरे से होगी जांच; 8 आरोपितों पर दर्ज है मुकदमा

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सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के भनवापुर ब्लॉक में हुए बहुचर्चित कथित फर्जी शिक्षक भर्ती प्रकरण में अब नए सिरे से जांच शुरू हो गई है। डीआईजी बस्ती रेंज संजीव त्यागी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी विवेचना डुमरियागंज के सीओ बृजेश वर्मा को सौंप दी है। पुलिस पिछले एक साल से इस पूरे फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी हुई है। नए सिरे से विवेचना शुरू होने के बाद अब मामले में कड़ी कार्रवाई की उम्मीद तेज हो गई है।

फर्जी नियुक्ति पत्रों से विद्यालय आवंटन का आरोप

बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जून 2024 में जिले में नवचयनित 314 अभ्यर्थियों के विद्यालय आवंटन की प्रक्रिया पूरी की गई थी। इसके तहत भनवापुर ब्लॉक के 36 अभ्यर्थियों को विभिन्न विद्यालयों में तैनाती दी गई थी। आरोप है कि इन्हीं में से आठ अभ्यर्थियों ने कूटरचित (फर्जी) नियुक्ति पत्रों के सहारे विद्यालय आवंटन आदेश प्राप्त कर लिए और विद्यालयों में कार्यभार भी ग्रहण कर लिया।

विभागीय जांच में जब इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ, तो तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) बिंदेश्वरी प्रसाद मिश्रा की तहरीर पर 7 सितंबर 2024 को त्रिलोकपुर थाने में आठ आरोपितों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया गया। नामजद आरोपितों में वाराणसी, महराजगंज, संतकबीरनगर और गोंडा जिले के निवासी शामिल हैं।

संतकबीरनगर के शिक्षक पर मास्टरमाइंड होने का शक

मामले की शुरुआती विवेचना तत्कालीन बिस्कोहर पुलिस चौकी प्रभारी मनोज कुमार सिंह कर रहे थे। शुरुआती जांच के दौरान जब तीन आरोपितों से गहन पूछताछ की गई, तो संतकबीरनगर के एक परिषदीय विद्यालय में तैनात शिक्षक का नाम सामने आया। आरोपितों का दावा था कि उसी शिक्षक ने उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र उपलब्ध कराए थे। हालांकि, विवेचक का स्थानांतरण हो जाने की वजह से जांच ठंडे बस्ते में चली गई थी।

पुलिस का बयान: जल्द होगी पूछताछ

अब कमान संभालते ही नए विवेचक व डुमरियागंज के सीओ बृजेश वर्मा ने मामले की तह तक जाने की तैयारी कर ली है। सीओ के मुताबिक, संतकबीरनगर के जिस शिक्षक का नाम उजागर हुआ है, उसके खिलाफ पुलिस को कई पुख्ता साक्ष्य मिले हैं। जल्द ही उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की जाएगी और पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जाएगा।

फिलहाल, पुलिस की इस नई जांच से शिक्षा विभाग और जालसाजों के नेटवर्क में हड़कंप मचा हुआ है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच आगे बढ़ने पर कौन-कौन से नए तथ्य सामने आते हैं और मुख्य गुनहगारों पर क्या कार्रवाई होती है।