गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक MLC चुनाव: उसका बाजार के ध्रुव त्रिपाठी 307 वोट से जीते, चौथी बार पहुंचे विधान परिषद , विधायक विनय वर्मा , डॉ चंद्रेश उपाध्याय , सुनील अग्रहरि ,रवि अग्रवाल सहित शुभचिंतकों ने दी बधाई

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**सिद्धार्थनगर/गोरखपुर।** गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव में सिद्धार्थनगर जिले के उसका बाजार निवासी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने जीत दर्ज की है। भाजपा प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे त्रिपाठी ने निर्दलीय उम्मीदवार राजीव कुमार यादव को 307 मतों के अंतर से हराया। इसके साथ ही वे चौथी बार विधान परिषद पहुंच गए हैं।

**कांटे की टक्कर, करीब 36 घंटे चली गिनती**

अंतिम नतीजे में ध्रुव त्रिपाठी को 14,887 और राजीव यादव को 14,580 मत मिले। मुकाबला इतना करीबी था कि मतगणना करीब 36 घंटे चली और हर राउंड के साथ दोनों प्रत्याशियों के बीच अंतर घटता-बढ़ता रहा।

पहली वरीयता की गिनती में ध्रुव त्रिपाठी को 11,881 और राजीव यादव को 11,415 वोट मिले थे, यानी तब अंतर 466 वोट का था। संजयन त्रिपाठी को 8,301 और अजय सिंह को 2,503 वोट मिले। बाकी प्रत्याशी इनसे काफी पीछे रहे। बाद के राउंड की गिनती के बाद जीत का अंतिम अंतर 307 वोट रहा।

**जीत के बाद बोले त्रिपाठी**

जीत के बाद ध्रुव त्रिपाठी ने खुशी जाहिर की और विरोधियों की ओर से लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। इस नतीजे को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले में भाजपा की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।

**शिक्षक राजनीति से विधान परिषद तक का सफर**

ध्रुव त्रिपाठी का राजनीतिक सफर शिक्षक राजनीति से शुरू हुआ। वे उसका बाजार के बाबा हरिदास इंटर कॉलेज में शिक्षक रहे। 1990 के दशक में माध्यमिक शिक्षक संघ के शर्मा गुट से जुड़कर वे संगठन की राजनीति में सक्रिय हुए। उन्होंने करीब 10 वर्ष जिला मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली।

वे वर्ष 2008 से लगातार इस सीट से एमएलसी चुने जाते रहे हैं। 2020 में उन्होंने जीत की हैट्रिक लगाई थी, जब उन्होंने अजय सिंह को हराया था और पहली वरीयता के मतों में अंतर 854 का रहा था। अब तक वे निर्दलीय एमएलसी थे। इस बार भाजपा ने उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया और उनकी जीत के बाद पार्टी खेमे में खुशी है। उनका मौजूदा कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रहा है।

**17 जिलों के शिक्षक मतदाता**

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक क्षेत्र में 17 जिले आते हैं, जिनमें सिद्धार्थनगर भी शामिल है। चुनाव की घोषणा के साथ ही इन सभी जिलों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई थी। चुनाव में भाजपा ने संगठन स्तर पर पूरी ताकत झोंकी थी और शिक्षक मतदाताओं तक पहुंचने के लिए विधानसभावार संयोजकों को जिम्मेदारी दी गई थी।