वर्ल्ड स्ट्रोक डे विशेष: समय पर पहचान और सही इलाज से बच सकती है ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की जान – डॉ सी बी चौधरी

निजाम अंसारी

सिद्धार्थ नगर : ‘वर्ल्ड स्ट्रोक डे’ (29 अक्टूबर) के अवसर पर चिकित्सा विशेषज्ञों ने स्ट्रोक (ब्रेन अटैक) के प्रति गंभीर जागरूकता फैलाई है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्ट्रोक दुनिया भर में मृत्यु का एक बड़ा कारण और विकलांगता का चौथा सबसे बड़ा कारण है। थोड़ी सी सावधानी, शुरुआती लक्षणों की पहचान और समय पर अस्पताल पहुंचना किसी की जान बचा सकता है।

क्या होता है स्ट्रोक और इसके मुख्य कारण?

स्ट्रोक एक ऐसी स्थिति है जब दिमाग के किसी हिस्से में रक्त का प्रवाह अचानक रुक जाता है या कोई रक्त वाहिका फट जाती है, जिससे मस्तिष्क में रक्तस्राव होने लगता है।

प्रमुख कारण: उच्च रक्तचाप (बीपी), मधुमेह (डाइबीटिज़), बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, शराब का अत्यधिक सेवन, मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारक हैं।

बीपी और कोलेस्ट्रॉल का खतरा: उच्च रक्तचाप और खराब कोलेस्ट्रॉल धमनियों में वसा जमा कर रक्त प्रवाह को बाधित करते हैं, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है।

स्ट्रोक के लक्षण पहचानें – ‘FAST’ सूत्र अपनाएं

शुरुआती दौर में अक्सर स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन निम्नलिखित संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:

  • F (Face – चेहरा): चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा या झुका हुआ महसूस होना।

  • A (Arms – बांह): एक बांह में कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना।

  • S (Speech – बोली): बोली का अस्पष्ट होना या बोलने में कठिनाई।

  • T (Time – समय): जैसे ही ऐसे लक्षण दिखें, तुरंत डॉक्टर या अस्पताल पहुंचें क्योंकि ‘Time is Brain’—जितनी जल्दी उपचार होगा, सामान्य जीवन जीने की उतनी ही अधिक संभावना होगी।

बचाव और रोकथाम के उपाय

  • ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल को हमेशा नियंत्रित रखें।

  • नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह पर ही दवाइयों का सेवन करें।

  • संतुलित आहार लें, प्रतिदिन व्यायाम करें और वजन पर नियंत्रण रखें।

  • धूम्रपान और शराब के सेवन से पूरी तरह दूरी बनाएं।