सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में धूम धाम से मनाई गई अम्बेडकर जयन्ती

kapilvastupost reporter 

सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर में बोधिसत्व बाबा साहब डॉ. भीम राव अम्बेडकर की जयंती धूमधाम से मनाई गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुई डॉ. दीपक मिश्रा ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने राष्ट्र की तरक़्क़ी के लिए आर्थिक दर्शन, सामाजिक दर्शन, राजनीतिक दर्शन और सांस्कृतिक दर्शन के माध्यम से भारत उन्नयन किया। हमें उनके दर्शन को आगे बढ़ाना चाहिए जिससे हमारा देश हर तरह से उन्नति करे।

इस प्रोग्राम के विशिष्ट अतिथि और विश्विद्यालय के वित्त अधिकारी अजय कुमार सोनकर ने कहा कि कोलम्बिया विश्वविद्यालय के विद्यार्थी रहे और उसके सर्वे के अनुसार डॉ. अम्बेडकर दुनिया से सबसे बड़े विद्वान हैं। जिनकी जयंती संयुक्त राष्ट्र संघ सहित विश्व के 150 देशों से ज़्यादा देशों में मनाई जा रही है। संविधान निर्माता के रुप में उन्होंने प्रारूप समिति के सभापति के रुप में जो कार्य किये वह बेमिसाल हैं।

अगर डॉ. अम्बेडकर नहीं होते इतना अच्छा संविधान नहीं बन पाता। हिन्दू कोडबिल के माध्यम से महिलाओं को पिता और पति की संपत्ति में अधिकार दिए।

विशिष्ट अतिथि प्रो. सौरभ श्रीवास्तव ने डॉ. अम्बेडकर के राष्ट्र के प्रति महान योगदान को उल्लेखित करते हुये अपना कविता संग्रह “प्राण परिचय” से डॉ. अम्बेडकर को समर्पित करते हुए बहुत ही मार्मिक कविता पाठ किये। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति जाति से नहीं बल्कि अपने कर्म से महान बनता है।

डॉ. अम्बेडकर तथागत भगवान बुद्ध के धम्म को अपने और सम्पूर्ण मानवता का दर्शन देते हुये विश्व कल्याण के लिये धम्म चक्क पवत्तन किये। हमें उनके दर्शन को अपने जीवन में उतारना चाहिए।

डॉ. बाल गंगाधर ने बताया कि डॉ. अम्बेडकर ने राष्ट्र निर्माण में भारत के डिफेंस मैकेनिज्म पर कार्य करते हुये भारत की राजधानी हैदराबाद बनाना चाहते थे जिससे विदेशी आक्रांताओं से सुरक्षित रहे और देश के मध्य भाग में होने की वजह से पूरे भारतवासी सुरक्षित रहेंगे। लंदन में हुये गोलमेज सम्मेलन में शोषितों, पीड़ितों व वंचितों के अधिकार की बात करते हुये उनके अधिकारों के लिए संविधान में वर्णित होने के लिए जो साक्ष्य व बिन्दुओं को उठाये वह बाद में भारतीय संविधान में सम्मिलित हुआ था।

भारतीय कृषि के उन्नयन हेतु जो विचार रखे वह बाद में पंचवर्षीय योजना में लागू हुआ। जिसको बाबू जगजीवन राम लीड किये थे। बाबा साहब ने थॉट्स आन लिंगविस्टिक स्टेट 1955 में कहा कि उत्तर प्रदेश का तीन हिस्सों में विभाजन होना चाहिए जिसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजधानी मेरठ, मध्य उत्तर प्रदेश की राजधानी कानपुर और पूर्वांचल की राजधानी इलाहाबाद होनी चाहिए।

मध्य प्रदेश को दो हिस्सों में बांटा जाना चाहिए जिसमें रायपुर हर दूसरे की राजधानी भोपाल होनी चाहिए। बिहार का दो विभाजन होना चाहिए जिसमें एक कि राजधानी पटना और दूसरे की राजधानी रांची होना चाहिए। और यह बताया कि पूरी दुनिया में बाबा साहब के विचारों को कोई भी गलत साबित नहीं कर सका है।

कार्यक्रम का संयोजन व संचालन करते हुए डॉ. धर्मेंद्र कुमार प्रोग्राम के शुरुआत में पाली श्लोक में भीम पाठ किये और अपने विचार रखते हुये बोले कि देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए डॉ. अम्बेडकर की वैचारिकी को पूर्णरूपेण लागू करना होगा।

डॉ. जय सिंह यादव ने कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन करते हुये बोले कि मण्डल कमीशन का लागू होना भारतीय संविधान को और भी विस्तृत रुप दिया। जिससे पिछड़े वर्ग को आरक्षण मिल सका। डॉ. आज़ाद कुमार ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण राष्ट्र के सूरज हैं जिन्होंने अपने बेमिसाल योगदान से सम्पूर्ण विश्व को प्रकाशमान किया। इस उपलक्ष्य में तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंतर्गत जिसमें “भाषण प्रतियोगिता, निबन्ध प्रतियोगिता, पेंटिग प्रतियोगिता एवं समापन व पुरस्कार वितरण का आयोजन हुआ।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सहयुक्त आचार्य डॉ. सत्येंद्र कुमार दुबे, डॉ. लक्ष्मण सिंह, डाॅ. संतोष सिंह, डॉ. अब्दुल हफीज, डॉ. मन्नू खान, डॉ. मनीषा बाजपेयी, डॉ सरिता सिंह, डॉ यशवंत यादव, डॉ. हरेन्द्र कुमार शर्मा, डॉ. रक्षा, डाॅ.किरन गुप्ता, डॉ. विनीता रावत, डॉ. अरविंद कुमार रावत, डॉ विमल चन्द्र वर्मा
समस्त नव नियुक्त लिपिक कर्मचारी, सैकड़ों छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।