सिद्धार्थ नगर – प्रधानों पर कार्यवाही नहीं होने से बर्बाद हो रहा है देश का पैसा , CDO की जाँच में 35 मजदूर कम मिले

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बीते गुरुवार को जयेंद्र कुमार, मुख्य विकास अधिकारी द्वारा विकास खण्ड शोहरतगढ़ के ग्राम पंचायत मकडौर नीबी में रामलगन के खेत से परिगवा गांव के सरहद तक कुला खुदाई कार्य का निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के समय राकेश कुमार शुक्ल, खण्ड विकास अधिकारी, शोहरतगढ, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सहित अन्य ग्रामवासी उपस्थित रहे l मस्टररोल के अनुसार 48 श्रमिक नियोजित किया गया है जिसके सापेक्ष निरीक्षण के समय मात्र 13 श्रमिक उपस्थित थे l

ग्राम रोजगार सेवक मौके पर उपस्थिति नहीं थे l खण्ड विकास अधिकारी को निर्देशित किया गया कि कार्यस्थल पर मौजूद श्रमिकों की ही हाजिरी एनएमएस पर दर्ज करें l

एवम महिला मेट नही लगाया गया था l कार्यस्थल पर सी.आई.बी. बोर्ड नही लगाया गया है l तत्काल सीआइबी लगाने के निर्देश किया गया l खण्ड विकास अधिकारी को निर्देशित किया गया कि प्राकलन में निर्धारित गहराई में कुला खुदाई कार्य कराना सुनिश्चित करें l

बताते चलें कि NMMS सिस्टम के माध्यम से अटेंडेंस नहीं मास्टर रोल की अपेक्षा दस प्रतिशत मजदूर ही रहते है कार्यस्थल पर पांच बजे के बाद चहेते लोगों की लगती है हाजिरी |

शोहरतगढ़ और बढ़नी विकास खंड में मनरेगा कार्यों का यही हाल है ग्राम पंचायतों में हो रहे काम और मजदूरों की डिमांड और मौके पर मजदूरों का कम होना या नहीं होना ज्यादा ही दिखता है।

देश की मेहनत की कमाई का पैसा सिर्फ और सिर्फ एक आदमी ही के जेब में जा रहा है प्रधान करोड़ पति होते जा रहे हैं ग्रामीणों को काम ही नहीं मिल रहा है । मजदूर बताते हैं साहब जब कागज में ही काम हो रहा है तब हम कार्यस्थल पर कैसे दिखेंगे।

लूट भ्रष्टाचार का मामला राजनीति से जुड़ा हुवा है
जागरूक लोगों का कहना है कि प्रधान देश की राजनीति का आखिरी कड़ी यानी आखिरी इकाई होता है |

वर्तमान समय में गांव में कम से कम एक हजार वोट होते हैं जिन पर प्रत्यक्ष रूप से वर्तमान प्रधान का सत्तर प्रतिशत पकड़ होता है यही कारण है कि ग्राम प्रधान के खिलाफ कभी कोई वित्तीय अनियमितता या प्रशासनिक पकड़ से बहुत दूर होते हैं।

सामाजिक दुष्प्रभाव – प्रधान राजनीतिक व्यक्ति होने के साथ अपने विरोधियों को निशाना बनाते हैं अन्दर से प्रताड़ित करने का खेल चलता है उनके इस बदले की भावना से समाज में एक दूसरे के बीच दूरी बढ़ रही है |

अधिकारीयों के मौन समर्थन के कारण पूरे जनपद में मंरेगा कार्यों में जमीनी स्तर पर या कहें कार्यस्थल पर दस प्रतिशत से ज्यादा मजदूर कभी दिखे ही नहीं |

मनरेगा योजना में पैसे की बरबादी को कौन रोकेगा सरकार चिल्ला चिल्ला कर कह रही है न खाऊँगा न खाने दूंगा तो बाकि मजदूरों का पैसा जाता कहाँ है |देश का पैसा चुराने के लिए ही सेवक / प्रधान बनते है |