सिद्धार्थनगर: वायुसेना के जांबाजों ने पानी की टंकी पर फंसे युवकों को MI-17 से सुरक्षित निकाला, 15 मिनट चला ‘ऑपरेशन जिंदगी’

निजाम अंसारी
सिद्धार्थनगर। जनपद में एक बेहद चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद प्रशासन और भारतीय वायुसेना ने पानी की टंकी पर फंसे दो युवकों की जान बचा ली है। मुख्यमंत्री कार्यालय और राहत आयुक्त के समन्वय से गोरखपुर से मंगवाए गए वायुसेना के **MI-17 हेलीकॉप्टर** ने रविवार सुबह करीब 5:20 बजे दोनों युवकों को सुरक्षित एयरलिफ्ट किया।
बारिश ने बिगाड़ा खेल, तो बुलाई गई वायुसेना
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, रात भर युवकों को बचाने के लिए वैकल्पिक मार्ग और सड़क निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा था। रात 3:00 बजे तक काम लगभग पूरा हो चुका था, लेकिन अचानक हुई तेज बारिश ने अभियान में बाधा डाल दी। स्थिति की गंभीरता और सुरक्षा को देखते हुए जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने तत्काल शासन से संपर्क किया, जिसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर सेना का हेलीकॉप्टर मौके पर पहुंचा।
15 मिनट चला ‘ऑपरेशन जिंदगी’
सुबह 5:20 बजे हेलीकॉप्टर घटनास्थल (काशीराम आवास के पास) पर पहुंचा। वायुसेना के जवानों ने महज 15 मिनट के भीतर दोनों युवकों को सकुशल रेस्क्यू कर लिया। रेस्क्यू के तुरंत बाद दोनों को चिकित्सीय परीक्षण के लिए गोरखपुर ले जाया गया है।
मौके पर डटे रहे आलाधिकारी
पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन., एडीएम गौरव श्रीवास्तव, एएसपी प्रशांत कुमार और एसडीएम कल्याण सिंह मौर्य सहित भारी पुलिस बल ने की। सफल ऑपरेशन के बाद जिलाधिकारी ने त्वरित सहायता के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है।

रील बनाने का जुनून बना काल: सिद्धार्थनगर में पानी की टंकी से गिरे तीन किशोर, एक की मौत; दो का हुआ एयरलिफ्ट रेस्क्यू

​सोशल मीडिया पर ‘रील’ बनाने का शौक एक परिवार के लिए मातम में बदल गया। शहर के कांशीराम कॉलोनी के पास एक जर्जर पानी की टंकी पर चढ़कर रील बना रहे पांच किशोरों में से तीन सीढ़ी टूटने के कारण नीचे गिर गए। इस दर्दनाक हादसे में एक किशोर की जान चली गई, जबकि दो अन्य रात भर टंकी पर फंसे रहे, जिन्हें रविवार सुबह वायुसेना के हेलीकॉप्टर की मदद से सुरक्षित निकाला गया।

कैसे हुआ हादसा?

शनिवार दोपहर करीब 1:00 बजे झुलनीपुर का सिद्धार्थ अपने दोस्तों सनी, गोलू, पवन और कल्लू के साथ रील बनाने के लिए जर्जर पानी की टंकी पर चढ़ा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रील बनाने के बाद नीचे उतरते समय सिद्धार्थ, सनी और गोलू एक साथ सीढ़ी पर आ गए। अधिक भार के कारण जर्जर सीढ़ी टूट गई और तीनों नीचे गिर पड़े। इलाज के दौरान चिकित्सकों ने सिद्धार्थ को मृत घोषित कर दिया, जबकि सनी और गोलू का उपचार चल रहा है।

रात भर चला जद्दोजहद, सुबह पहुंची वायुसेना

हादसे के बाद पवन और कल्लू टंकी के ऊपर ही फंस गए। नीचे रास्ता न होने के कारण NDRF की टीम भी उन तक नहीं पहुंच सकी। प्रशासन ने रात में ही ड्रोन के जरिए उन तक खाना-पानी पहुंचाया और कच्ची सड़क का निर्माण शुरू किया। लेकिन सुबह हुई बारिश ने काम रोक दिया। अंततः मुख्यमंत्री कार्यालय के समन्वय से गोरखपुर से वायुसेना का MI-17 हेलीकॉप्टर मंगवाया गया और सुबह 5:20 बजे दोनों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित रेस्क्यू किया गया।

20 साल पहले ही होना था धवस्तीकरण

इस घटना ने प्रशासन की लापरवाही को भी उजागर किया है। बताया जा रहा है कि जिस टंकी पर यह हादसा हुआ, उसे 20 साल पहले ही ध्वस्त करने का आदेश दिया जा चुका था, लेकिन यह अब भी अस्तित्व में थी और बच्चों के लिए जानलेवा साबित हुई।