📅 Published on: April 30, 2024
kapilvastupost
सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज संसदीय सीट पर ब्राह्मण और कुरमी समाज भारतीय जनता पार्टी के परम्परागत वोट रहे हैं। परन्तु वर्तमान लोकसभा 2024 के इस चुनाव में ऐसे आसार बन रहे हैं कि डुमरियांज सीट पर भाजपा अपने इन दो बडे समर्थक को लेकर कुछ चिंतित है । भाजपा प्रत्याशी जगम्बिका पाल इस मतदाता समूह को छिटकने से रोकने के लिए काफी मेहनत करनी पडेगी।
ब्राह्मण वोटरों को लेकर सांसद पाल ने तो बाकायदा काम भी शुरू कर दिया है। 2014 और 2019 के चुनावों की अपेक्षा इस बार चुनावी बयार सामान्य है। इस बार बी जे पी के पास कोई अजेंडा नहीं है उसके सारे तीर ख़तम हो गए हैं | पिछले दोनों चुनाव मोदी के हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के नारे ने सारे जातीय समीकरण ध्वस्त कर डाला था और पूरी हिंदी पट्टी की तरह डुमरियागंज सीट पर भी भाजपा के जगदम्बिका पाल आसानी से जीत गये थे।
मगर इस बार हालात पूर्ववत नहीं हैं। 2024 में न तो हिंदुत्व और न ही पुलवामा जैसे राष्ट्रवादी नारे का जोर है, न ही जय श्रीराम के नारे लगाने वाली उत्साहित भीड ही दिखती है। इस बार के चुनाव में सांसद पाल के लगातार तीन कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड देखा जा रहा है। मंहगाई, बेरोजगारी ,मंहगी शिक्षा , आम आदमी की कमाई में कमी पर सरकार से जवाब की अपेक्षा की जा रही थी |
लिहाजा चुनाव सामान्य हालात में होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। डुमरियागंज सीट पर ब्राहमण और कुर्मी समाज तीस सालों से भाजपा के पक्ष में जम कर खड़ा दिखता रहा, परन्तु इस बार यह दोनों वोट बैंक उतनी ही मजबूती से खड़े रहेंगे इसमें संदेह है।
क्योंकि समाजवादी पार्टी ने इस बार यहां से ब्राह्मण प्रत्याशी उतार कर सबकों चौंका दिया है और यह प्रत्याशी कोई आम ब्राहमण नहीं बल्कि पूर्वांचल के ब्राह्मणों के नेता के रूप में विख्यात पंडित हरिशंकर तिवारी के पुत्र कुशल तिवारी हैं।
उनकी प्रत्याशिता घोषित होते ही जिस प्रकार उनका समाज उनके पीछे लामबंद होने लगा है वह भाजपा के लिए चिंता की बात है। सपा प्रत्याशी कुशल तिवारी को लेकर ब्राह्मण समाज में उत्साह बढ़ता जा रहा है। यह उत्साह कहां तक कायम रह पायेगा, यह देखने की बात होगी।
इसके बरअक्स भाजपा प्रत्याशी जगदम्बिका पाल डैमेज कण्ट्रोल करने के लिए सभी विपक्षी दलों के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों को भाजपा में शामिल करा कर सपा प्रत्याशी को अपने तरीके से जवाब देने में पर भारतीय समर्थक हालात पर वर्ग इसलिए को सच्चिदा पांडेय, बसपा नेता अशोक पांडेय आदि को भाजपा में शामिल कराने से सांसद पाल को कितना लाभ मिलेगा, यह भविष्य के गर्भ में हैं।
फिलहाल तो भाजपा के पक्ष में दिखने वाले आम ब्राह्मण मतदाता का बड़ा समूह तो आज सपा प्रत्याशी के इर्द गिर्द सिमटता दिख रहा है। कल क्या होगा यह दोनों प्रत्याशियों की अपनी रणनीति पर निर्भर करेगा। जहां तक कुर्मी मतदाताओं का सवाल है, इस बार सपा कांग्रेस गठबंधन ने महाराजगंज, बस्ती, गोंडा आदि सीटों पर कुर्मी प्रत्याशी उतारा है। जबकि भाजपा ने केवल महाराजगंज में एकमात्र कुर्मी प्रत्याशी दिया है।
कुर्मी वोट चौधरी अमर सिंह के साथ रहने से और बढेंगी मुश्किलें
कुर्मी समाज के बड़े एवं कद्दवार एवं सर्वमान्य नेता के रूप में चौधरी अमरसिंह माने जाते हैं स्वयं सिद्धार्थनगर से कुर्मी जाति के पूर्व विधायक अमर सिंह से सांसद पाल का छत्तीस का आंकडा है। ऐसे में माना जाता है कि कुर्मी समाज का एक तबका इस बार भाजपा के खिलाफ जा सकता है।
खबर है कि आज शाम मंगलवार तक बसपा का टिकट बदल कर अमरसिंह को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। ऐसी इनपुट भी रिपोर्टर को मिले हैं और यह काफी मजबूत बात भी सिद्ध होती है कि सोमवार को बहुजन समाज पार्टी की तरफ से अमर सिंह चौधरी ने भी दो सेट परचा खरीदा है | यदि ऐसा हुआ तो भाजपा के लिए सह बुरी खबर साबित होगी।