सिद्धार्थ नगर – प्रशासनिक अराजकता के कारण अवैध खनन के दौरान मृतक मायाराम को नहीं मिल रहा इंसाफ – विधायक विनय वर्मा

एक तरफ सरकार जहाँ शुशासन की बात करती है आम नागरिकों के हितों की बात करती है वहीं शोहरतगढ़ विधानसभा में अपना दल एस के विधायक विनय वर्मा अपने ही विधान सभा क्षेत्र में लोगों को इन्साफ नहीं दिला पा रहे हैं |

कार्यवाही नहीं होने से आम जनता के बीच चर्चा बढ़ रही है की सरकार में जब एक विधायक की नहीं सुनायी हो रही है तो आम नागरिकों की क्या सुनायी होगी | अवैध खनन माफियाओं के हौशले बुलंद हो रहे हैं |

kapilvastupost 

अपने विधानसभा क्षेत्र ढ़ेबरुआ के गड़रखा में पिछले दिनों अवैध खनन के दौरान हुई भयानक हादसा के बाद अकरा गाँव निवासी, मृतक ट्रॉली चालक मायाराम को इंसाफ़ के नाम पर प्रशासन और अधिकारियों की ग़ैरज़िम्मेदारी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।

एक तरफ उच्च अधिकारी आईजी साहब इस केस की जाँच हेतु निर्देश देने की बात अपने सोशल मीडिया पर करते हैं तो दूसरी तरफ थाना प्रभारी ढ़ेबरुआ अख़बार में बयान देते हैं कि उनको उपर से कोई निर्देश ही नहीं आया है।

इस मामले में ज़िला पुलिस कप्तान की भी चुप्पी समझ से परे हैं। आख़िर इस पूरे प्रकरण को इतना पेचीदा क्यों बनाया जा रहा है? यहॉं तक की आज हमारे आवास व कैंप कार्यालय में वहाँ के ग्रामवासियों ने हमसे मिलकर साफ-साफ शब्दों में कहा कि इस घटना में प्रधान की पूरी संलिप्तता है।

आखिर आईजी साहब के इन निर्देशों की अवहेलना कप्तान व नीचे का पुलिस प्रशासन किस अधिकार और विश्वास के कारण कर रहे हैं? पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में ऐसी असंवेदनशीलता प्रदेश की सरकार के साथ-साथ माननीय मुख्यमंत्री जी की छवि को धूमिल करने वाला है।

पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई सुनिश्चित करने हेतु मेरा संघर्ष जारी रहेगा। इस पूरे प्रकरण में सामने आ रहे संदेह से पर्दाफ़ाश जरुर होगा |

प्रशासनिक अराजकता का इससे बड़ा सबूत क्या हो सकता है कि खनन पदाधिकारी से लेकर, एडीएम, एसडीएम, थाना प्रभारी सभी के सभी टालमटोल करने में लगे हैं। आख़िर एसडीएम शोहरतगढ़ एवं थाना प्रभारी ढ़ेबरुआ को इतना बल कहाँ से आ रहा है कि वो सरेआम, जाँच के किसी भी आदेश को ख़ारिज कर रहे हैं।

इतना ही नहीं पीड़ित परिवार से हमारा मिलना भी इनलोगों को नागवार गुजर रहा है कि उनसे अपने बचाव व पक्ष में वीडियो बनवा रहे हैं। आख़िर, इस सच्चाई से कोई कैसे मुकर सकता है कि वहाँ अवैध खनन नहीं हुआ है? यह तो साक्षात देखने की बात है।

आख़िर यह कौन बतायेगा कि उस मृतक चालक का ज़िम्मेदार कौन है? अवैध खनन किसके इशारे पर हो रही थी? क्या वो अवैध खनन नहीं था? मेरी मंशा बस इतना है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जाँच की जाये, दोषियों को सजा मिले और पीड़ित परिवार को न्याय मिले।