सिद्धार्थ नगर –  खण्ड विकास अधिकारी द्वारा रिश्वत मांगने पर ग्राम प्रधानों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने किया विरोध

बेलगाम अफसर शाही ने जिले के हर ब्लाकों में भर्ष्टाचार बढ़ रहे है लगातार जनप्रतिनिधियों के अधिकारों की अनदेखी जारी  है जिससे भरष्टाचार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है | 

निज़ाम अंसारी

सिद्धार्थ नगर जिले के जोगिया ब्लॉक में खण्ड विकास अधिकारी (बीडीओ) द्वारा विकास कार्यों की स्वीकृति के लिए रिश्वत मांगने के आरोपों के बाद ग्राम प्रधानों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन जोगिया ब्लॉक मुख्यालय पर आयोजित किया गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य शामिल हुए।

ग्राम प्रधानों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों का आरोप है कि बीडीओ ने विभिन्न विकास योजनाओं की स्वीकृति के लिए उनसे अवैध रूप से धन की मांग की है। उनका कहना है कि बिना रिश्वत दिए किसी भी योजना की स्वीकृति संभव नहीं हो पा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों का विकास प्रभावित हो रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने बीडीओ कार्यालय के सामने धरना दिया और “रिश्वतखोरी बंद करो” और “ईमानदारी से काम करो” जैसे नारों के साथ अपनी नाराजगी व्यक्त की। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्राम प्रधान कय्यूम ने कहा  “यह बहुत दुखद है कि विकास कार्यों को लेकर हमारे गांवों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भ्रष्टाचार के कारण जनता की भलाई के कार्य ठप्प हो गए हैं। हम इस भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहेंगे।”

वही ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि शिरीष ने कहा हमारे विकास खण्ड में तैनात खण्ड विकास अधिकारी इतने तानाशाह हैं कि कहते हैं हम ग्राम प्रधानों को जेल भेजवा देंगे। क्षेत्र पंचायत का काम हो या ग्राम पंचायत का काम हो सभी कार्यों में वह कहते हैं हमको एडवांस कमीशन चाहिए। मार्च में माह में जिस कार्य का टेंडर हो चुका है उसका भी कार्य बीडीओ करने नहीं दे रहे हैं। वह हर बात में कमीशन मांगते हैं।

प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की और कहा कि अगर बीडीओ के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो वे अपने विरोध को और तेज करेंगे। जिला प्रशासन ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है और कहा है कि दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है और भ्रष्टाचार के खिलाफ जनाक्रोश को उजागर कर दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन किस प्रकार इस मामले को सुलझाता है और भ्रष्टाचार के खिलाफ क्या कदम उठाता है।