📅 Published on: July 19, 2024
धर्म, समाज और कानून की दृष्टि से मंदिर की मूर्तियों को तोड़ने की यह घटना अत्यंत निंदनीय है। धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखना और सभी धर्मों के प्रति सम्मान रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
समाज को इस प्रकार की घटनाओं से सबक लेते हुए धार्मिक सहिष्णुता और एकता को प्रोत्साहित करना चाहिए। कानून को भी ऐसे मामलों में सख्ती से कार्यवाही करते हुए दोषियों को दंडित करना चाहिए, ताकि सभी नागरिकों में न्याय और सुरक्षा की भावना बनी रहे।
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सिद्धार्थनगर में एक पुजारी द्वारा 2 समुदायों के बीच झगड़ा लगाने की बड़ी साजिश उस समय नाकाम हो गई।जब कुछ छोटे बच्चों ने पुलिस को सच्चाई बताई।
घटना कठेला समयमाता थाना क्षेत्र के अंतर्गत तौलिहवा की है। यहां एक मंदिर के पुजारी क्रिचराम ने 2 मुस्लिम लड़कों पर भगवान की मूर्ति तोड़ने का आरोप लगाया था।
पुलिस ने जांच की तो पता चला की वादी क्रिचराम और नामजद युवकों के परिवार बीच रंजिश है मौके पर खेल रहे बच्चों ने बताया की पुजारी को मूर्ती तोड़ते हुए हम सब ने देखा था।
पुलिस डिप्टी एस पी दरवेश कुमार ने बताया कि पुजारी क्रिचराम ने तहरीर दी कि गांव में रहने वाले 2 मुस्लिम लड़कों मन्नान और सोनू ने मंदिर में रखी गणेश की प्रतिमा को तोड़ दिया।
पुलिस ने मामला दर्ज कर गहनता से जांच शुरू की और प्रशासन के अधिकारियों के साथ गांव पहुंचे। जांच में पता चला कि घटना के समय मंदिर के पास कुछ बच्चे मौजूद थे। पुलिस ने उनसे पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि मूर्ति को साधु बाबा ने तोड़ा है|
पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने बच्चों की बात पर विश्वास करते हुए पुजारी से गहनता से पूछताछ की तो पुजारी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
डिप्टी एस पी ने बताया कि पुजारी का सोनू और मन्नान का झगड़ा चलता रहता है, इसलिए पुजारी ने उनको मुकदमे में फंसाने के उद्देश्य से मूर्ति तोड़ दी और तहरीर थाने में दी।
सी ओ शोहरतगढ़ दरवेश कुमार ने बताया की उन्होंने अपना जुर्म कबूल किया है आरोपी पुजारी के खिलाफ विधिक कार्यवाही की जा रही है मौके पर शांति व्यवस्था बनी हुई है ।
बताते चलें कि समाज में धर्म एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और धार्मिक सहिष्णुता और सद्भावना सामाजिक एकता के लिए आवश्यक हैं। इस प्रकार की घटनाएँ समाज में धार्मिक भेदभाव और सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा देती हैं।
पुजारी द्वारा जानबूझकर मुस्लिम युवकों को फंसाने की कोशिश से समाज में आपसी विश्वास और सहयोग को गहरा धक्का पहुँचता है। समाज में इस प्रकार की घटनाओं से सावधान रहना चाहिए और धार्मिक सहिष्णुता को बचाने के लिए पुलिस के कार्य सराहनीय हैं |