📅 Published on: November 10, 2024
सूत्र बताते हैं कि जिले में खाद की किल्लत के जिम्मेदार नेपाल सीमा से पांच किलोमीटर पर खुले उर्वरक विक्रेता जिम्मेदार हैं वह अपनी आमदनी बढाने के लिए मंहगे दामों पर खाद का स्टॉक कर लेते हैं और तस्करों को बेचते हैं |
kapilvastupost
भारत-नेपाल की खुली सीमा पर स्थित सिद्धार्थ नगर जिले में खाद की तस्करी एक गंभीर समस्या बन चुकी है, जिससे दोनों देशों के किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। तस्करी के कारण आवश्यक उर्वरकों की स्थानीय उपलब्धता कम हो जाती है और कीमतें बढ़ जाती हैं, जिससे भारतीय सीमावर्ती किसानों को खेती के लिए जरूरी खाद की कमी झेलनी पड़ती है।
खाद की तस्करी का मुख्य कारण भारत में इसकी अपेक्षाकृत कम कीमत और नेपाल में इसकी उच्च मांग है। तस्करी करने वाले लोग भारत से सस्ते दर पर उर्वरक खरीद कर उसे नेपाल में ऊंची कीमत पर बेच देते हैं, जिससे दोनों देशों में खाद के वितरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
इस मुद्दे से निपटने के लिए सीमावर्ती सुरक्षा बलों को सख्ती से कदम उठाने की आवश्यकता है। साथ ही, सरकार को स्थानीय किसानों के लिए खाद की आपूर्ति सुनिश्चित करने और तस्करी पर नियंत्रण के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।
कई स्थानों पर स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि किसानों ने दुकानों के सामने हंगामा किया। इसके जवाब में प्रशासन को पुलिस बल तैनात कर खाद का वितरण व्यवस्था अपने हाथों में लेना पड़ा। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस समय मांग बहुत अधिक है जबकि सप्लाई में थोड़ी कमी आई है, लेकिन वे इस समस्या का समाधान जल्द ही करने का आश्वासन दे रहे हैं।
सूत्रों ने बताया कि उर्वरक आपूर्ति में कमी को पूरा करने के लिए डी एम डी राजा गणपति आर इस दिशा में ठोस कदम उठाने वाले है। किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है, जल्द ही खाद की आपूर्ति सामान्य हो जाएगी।”
किसान संगठनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि वे खाद की आपूर्ति में सुधार के लिए और प्रयास करें ताकि उनकी फसलों का नुकसान न हो।