सिद्धार्थ नगर – मस्जिदों से माइक हार्न उतारे जाने को लेकर ऐमिम पदाधिकारियों ने डी एम से लगायी गुहार

आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के जिला अध्यक्ष निशात अली की अगुवाई में जिलाधिकारी को सौंपा गया प्रार्थना पत्र

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सिद्धार्थनगर!ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के जिला अध्यक्ष निशात अली ने जानकारी देते हुए कहा कि जिला अधिकारी को प्राथना पत्र देकर मुख्यालय स्थित लगभग अधिकतर मस्जिदों से लाउडस्पीकर को पुलिस प्रशासन द्वारा बिना किसी आदेश एवं कारण के जोर जबरदस्ती के बल पर उतरवा दिया गया है।

जिसके सम्बन्ध मे कार्रवाही करने व पुनः मस्जिदों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार लाउडस्पीकर से अजान के लिए मांग की गई है!

इस मौके पर ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के जिला अध्यक्ष ने कहा कि पुलिस प्रशासन के द्वारा की गई कार्रवाही से मस्जिद कमेटी व मुस्लिम समुदाय के लोग भयभीत है।

इससे मुस्लिमों के हितों पर आवरण आने के साथ ही साथ धार्मिक स्वतन्त्रता के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि विदित हो कि बार-बार पुलिस प्रशासन द्वारा इस तरह का दुर्भावना से ग्रसित धार्मिक भेदभाव जैसा असंवैधानिक कृत्य अर्थात एकपक्षीय कार्यवाही विगत पिछले वर्ष से ही किया जाता रहा है। जिससे जनपद के समस्त मुस्लिम समाज काफी आहत हैं।

आगे कहा कि पिछले वर्ष ही जनपद के समस्त मस्जिद कमेटियों द्वारा मस्जिदों से पांचों वक्त मात्र 2 मिनट के औसत से 24 घण्टे में 10 मिनट की समयावधि के लिए माइक से माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश के अनुक्रम में अजान दिये जाने के बाबत परमीशन हेतु उपजिलाधिकारी महोदय के समक्ष आनलाइन एवं आफलाइन आवेदन मय शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया था परन्तु थाना मुकामी की पुलिस द्वारा रिपोर्ट/आख्या लगाने के नाम पर मस्जिद कमेटियों से एक-एक हजार और दो-दो हजार रूपया सुविधा शुल्क के रूप में नाजायज धन वसूली किये जाने के बावजूद भी न तो परमीशन की कापी ही उपलब्ध करायी गयी और न ही कोई दिशा-निर्देश ही मस्जिद कमेटियों को आज तक उपलब्ध कराये गये।

उल्टा मुसलमानों के खिलाफ निषेधात्मक कार्यवाही करके घोर उत्पीड़न किया जा रहा है। उक्त के बाबत कई बार जनपद मुख्यालय स्थित मस्जिद कमेटियों के जिम्मेदार पिछले वर्ष से ही चार-पांच मरतबा जिला प्रशासन एवं पुलिस अधीक्षक महोदय से व्यक्तिगत मुलाकात कर वार्ता एवं प्रार्थना-पत्र तथा ज्ञापन भी दे चुके हैं परन्तु मुसलमानों के साथ दोहरा रवैय्या एवं संकुचित मानसिकता का परिचय देते हुए थाना मुकामी की पुलिस द्वारा बार-बार मुसलमानों को प्रताड़ित करने का काम किया जा रहा है।

जबकि इसके इतर वैवाहिक कार्यक्रमों एवं अन्य तथाकथित कार्यक्रमों में डी0जे0 एवं बड़े-बड़े साउण्ड के माध्यम से पूरा दिन और पूरी रात ध्वनि प्रदूषण यन्त्रों के जरिये शोरगुल एवं भड़काऊ भाषण का प्रयोग किया जाता रहता है जिस पर जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन द्वारा मौन धारण करते हुए उस पर कोई निषेधात्मक या निरोधात्मक कार्यवाही नहीं की जाती है जो काफी खेद का विषय है।

इस प्रकार पुलिस प्रशासन द्वारा बार-बार मुसलमानों का उत्पीड़न किया जा रहा है जो पूरी तरह से गैर कानूनी कृत्य है। साथ ही कहा कि विदित हो कि उक्त के बाबत तत्कालीन श्रीमान जिलाधिकारी महोदय, श्रीमान पुलिस अधीक्षक महोदय, श्रीमान उपजिलाधिकारी महोदय नौगढ़ (सदर) व अन्य तथा सम्बन्धित थानाध्यक्ष महोदय से मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतारे जाने को लेकर एक आर0टी0आई0 (जनसूचना अधिकार अधिनियम-2005) के तहत सूचना (कुल 7 बिंदुओं पर) माँगा गया था कि यदि जिला प्रशासन या पुलिस प्रशासन के पास माननीय उच्च न्यायालय या माननीय सर्वोच्च न्यायालय या प्रदेश सरकार या केन्द्र सरकार का उक्त के बाबत किसी तरह के आदेश या शासनादेश की कॉपी हो तो उसे मस्जिद कमेटी को उपलब्ध करायी जाये ।

जिसे जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन द्वारा किसी के भी आदेश या शासनादेश की कॉपी मस्जिद कमेटियों को उपलब्ध नहीं करायी गयी।

इससे साफ जाहिर होता है कि पुलिस प्रशासन मुसलमानों के प्रति भेदभाव एवं पक्षपातपूर्ण तथा मनमाना और तानाशाही रवैय्या अपना रहा है।

ऐसी दशा में श्रीमान जी से विनम्र आग्रह एवं अनुरोध है कि मस्जिदों से उतारे गये लाउडस्पीकर को सम्मान सहित पुनः पुनर्व्यस्थित कराने का आदेश तथा जब्त किये गये हार्न/साउण्ड और माइक मशीन को वापस दिलाया जाना अति आवश्यक एवं न्याय संगत है। आगे AIMIM के जिलाध्यक्ष निशात अली ने प्रार्थना पत्र के माध्यम से यह भी कहा कि श्रीमान् जी से सादर प्रार्थना एवं विनम्र अनुरोध है कि मस्जिदों से उतारे गये लाउडस्पीकर को सम्मान सहित पुनः पुनर्व्यस्थित कराने का आदेश देते हुए जनपद के पुलिस प्रशासन द्वारा जब्त किये गये मस्जिदों के हार्न एवं माइक मशीन को तत्काल थाना मुकामी की पुलिस से वापस/बरामद कराया जाये और जोर-जबरदस्ती के बल पर तानशाही रवैय्या अपनाते हुए एकपक्षीय रूप से मुसलमानों का उत्पीड़न करने वाले दूषित मानसिकता से ग्रसित व्यक्तियों (पुलिस कर्मियों) के विरूद्ध कठोर से कठोर एवं वैधानिक कार्यवाही की जाये,जिससे कि देश की एकता,अखण्डता और सौहार्दपूर्ण वातारण बरकरार रखने में सहायक सिद्ध हो सके।

इस दौरान अब्दुल मोबिन भाई खजूरिया: हाफिज कुतुबुद्दीन, रमजान अली, मोहम्मद मुस्तफा, मोहम्मद सामी, मौलाना इनायतुल्ला, हैदर अली, मोहम्मद कमाल, मोहम्मद अरमान, मोहम्मद अहमद, मोहम्मद जावेद, मोहम्मद अलीम, मोहम्मद अमीर , मोहम्मद आरिफ, मोहम्मद अशफाक, इश्तियाक अहमद, गुलजार अहमद, अनवर अली, अब्दुल वहाब आदि उपस्थित रहे।