अटल बिहारी वाजपेयी: एक अद्वितीय नेता और भारत के स्वर्णिम भविष्य के शिल्पकार – डॉ विमल व डॉ चंद्रेश

‘अटल’ मृत्यु है निर्भिक, आलिंगन कर जाऊँगा, हे भारत माँ मैं फिर आऊंगा, फिर आऊंगा। अंतिम नहीं है सफर मेरा, सृजन नहीं डगर मेरा, गौरव से मस्तक ऊँचा कर, विजय गीत को गाया है, बचपन से ही लहू से अपने मैंने तुझे सजाया है। तू माटी नहीं “माँ” है मेरी, तेरे कण-कण में मुस्काऊंगा हे भारत माँ मैं फिर आऊंगा, फिर जाऊँगा ।

आज भारत के दसवें प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मदिन है आज उनके 100 वें जन्मदिन पर गाँव से लेकर शहर तक कई जगह उनकी याद में कार्यक्रम किया गया | वे हिन्दी कवि, पत्रकार व एक प्रखर वक्ता थे|

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सिद्धार्थ नगर के जीवन ज्योति हॉस्पिटल के फाउंडर व चीफ डॉ विमल कुमार दिवेदी ने 100 वीं जयंती पर याद करते हुवे कहा भारत के महानतम नेताओं में से एक, अटल बिहारी वाजपेयी, केवल एक राजनीतिज्ञ नहीं थे, बल्कि एक कवि, विचारक, और आदर्शवादी व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति थे। उनका नाम भारतीय राजनीति में उनकी दूरदर्शिता, मानवीय दृष्टिकोण और प्रगतिशील दृष्टिकोण के लिए सदैव आदर से लिया जाता है। 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में जन्मे वाजपेयी जी भारतीय राजनीति के एक ऐसे सितारे थे, जिन्होंने अपने नेतृत्व से भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

उन्होंने कहा अटल जी मृदुभाषी और सम्मोहक वक्ता थे उनकी वक्तृत्व कला इतनी प्रभावशाली थी कि विरोधी भी उनके तर्कों के कायल हो जाते थे।

उनकी कविताओं में राष्ट्रप्रेम, मानवता और प्रेरणा की झलक मिलती थी। उनकी कविताएं “गीत नया गाता हूं” और “भारत जमीन का टुकड़ा नहीं” आज भी लाखों लोगों को प्रेरणा देती हैं।

वरिष्ट सर्जन डॉ विमल कुमार दिवेदी के अन्दर भी एक कवी मन बसता है आज बाजपेयी के जयंती पर उनको समर्पित कविता भी लिखी है जो खासा पसंद किया जा रहा है |

सिद्धार्थ नगर के V P L हॉस्पिटल के चीफ डॉ चंद्रेश कुमार उपाध्याय ने प्रधानमंत्री के रूप में देश को गौरान्वित करने वाली  उपलब्धियां पर चर्चा करते हुवे कहा कि देश के सर्वमान्य नेता ने बौद्धिक क्षमता से पोखरण परमाणु परीक्षण (1998) में भारत ने पोखरण में दूसरा परमाणु परीक्षण कर विश्व को अपनी शक्ति और स्वाभिमान का परिचय दिया। इस निर्णय ने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित किया।

कारगिल युद्ध में विजय (1999) कारगिल युद्ध के दौरान वाजपेयी जी के कुशल नेतृत्व और सेना के अदम्य साहस ने भारत को विजय दिलाई। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में पाकिस्तान की आक्रामकता को उजागर किया और भारतीय सेना का मनोबल बढ़ाया।

जनपद के सफल व्यापरी युवा समाज सेवी व नेता सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा, “अटल जी की नीति ‘सबका साथ, सबका विकास’ केवल एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि भारतीय समाज और अर्थव्यवस्था को समर्पित एक दिशा थी। उन्होंने छोटे उद्योगों और व्यापारियों के लिए ऐसे माहौल का निर्माण किया, जिसमें आत्मनिर्भरता और नवाचार को प्रोत्साहन मिला।”

उन्होंने प्रधानमत्री रहते हुवे राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (NHDP):

“स्वर्णिम चतुर्भुज योजना” उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक थी। इस परियोजना के तहत चारों महानगरों को जोड़ने वाले राजमार्ग बनाए गए, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और परिवहन में क्रांति आई।

सर्व शिक्षा अभियान: वाजपेयी जी ने “सर्व शिक्षा अभियान” की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य देश में प्राथमिक शिक्षा को हर बच्चे तक पहुंचाना था। इस योजना से शिक्षा के क्षेत्र में सुधार हुआ और बच्चों की साक्षरता दर बढ़ी।

आर्थिक सुधार और उदारीकरण: उनके कार्यकाल में भारत की अर्थव्यवस्था ने मजबूत गति पकड़ी। उन्होंने विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया और भारत को आर्थिक उदारीकरण की ओर अग्रसर किया।

ग्रामीण विकास और पंचायती राज: उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से देश के दूरदराज के गांवों को सड़कों से जोड़ा गया।

बताते चलें कि अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि भारतीय राजनीति के आदर्श पुरुष थे। उन्होंने देश को एक सशक्त, आत्मनिर्भर और सम्मानित राष्ट्र बनाने में अपना योगदान दिया। उनका जीवन और विचार हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

उनकी विरासत आज भी भारतीय राजनीति और समाज के लिए प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ है। उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए भारत को एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र बनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।