सिसवा उर्फ शिवभारी में मनरेगा घोटाला: सेक्रेटरी, एपीओ, बीडीओ सहित जिला प्रशासन पर उठ रहे सवाल 

सिद्धार्थ नगर – रोजगार सेवक कहता है 83 मजदूर लगे हैं APO कहते हैं 39 मजदूर काम पर थे किसको सही मानें डी एम साहब

गुरु जी की कलम से 

बढ़नी (सिद्धार्थनगर): बढ़नी ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत सिसवा उर्फ शिवभारी में मनरेगा योजना के तहत काम कर रहे मजदूरों की हाजिरी में बड़े घोटाले की आशंका जताई जा रही है। यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुका है, और इससे संबंधित अधिकारीयों के खिलाफ सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय लोगों और मजदूरों का आरोप है कि मनरेगा कार्यों में मजदूरों की उपस्थिति और कार्य की रिपोर्टिंग में गड़बड़ी की जा रही है। हाजिरी रजिस्टर में काम कर रहे मजदूरों और दिनों  को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाने का आरोप है, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है।

यह घोटाला ग्राम पंचायत के सेक्रेटरी, एपीओ, बीडीओ तक पहुंचता नजर आ रहा है, जो इस मामले में घेराबंदी का शिकार हो सकते हैं। बावजूद इसके खेल बदस्तूर जारी है |

ग्राम पंचायत के सेक्रेटरी पर आरोप है कि वह मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति को दर्ज करने की बजाय फर्जी तरीके से हाजिरी बना रहे हैं। साथ ही, एपीओ (आकस्मिक परियोजना अधिकारी) पर भी आरोप है कि उन्होंने इस घोटाले को अंजाम देने में उनका साथ दिया। क्योंकि उनके दौरे और कार्यवाही से सरकार को फायदा पहुँचने के बजाय ग्राम प्रधान को फायदा होता है |

B.D.O. की भूमिका पर भी सवाल स्थानीय नागरिकों और पंचायत सदस्यो का कहना है कि बीडीओ और सीडीओ ने इस घोटाले को नज़रअंदाज किया, जिसके कारण यह मामला व्यापक रूप ले पाया। बीडीओ ने कई बार निरीक्षण के नाम पर सिसवा उर्फ शिवभारी का दौरा किया लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

अब इस मामले में जनपद के ईमानदार जिला अधिकारी (डीएम) के हस्तक्षेप की आवश्यकता जताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि डीएम मामले में खुद संज्ञान लें और एक निष्पक्ष जांच कराएं तो यह घोटाला सामने आ सकता है और जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है। साथ ही सरकारी पैसे की रिकवरी भी |

स्थानीय लोग इस मामले में खुलकर सामने आकर आरोप लगाए हैं। उनकी मांग है कि घोटाले में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि योजनाओं का सही तरीके से कार्यान्वयन हो सके और मजदूरों को उनका हक मिल सके।

बताते चलें कि मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार देना है, लेकिन यदि इसमें घोटाले हो रहे हैं तो यह योजना अपनी मूल मंशा से भटक सकती है। इस समय क्षेत्रीय अधिकारियों और जिला प्रशासन पर भारी जिम्मेदारी है कि वे मामले की जांच करें और आवश्यक कदम उठाएं।

सवाल जो जवाब मांगते हैं:

मनरेगा में मजदूरों की फर्जी हाजिरी कैसे लगाई गई?

रोजगार सेवक के अनुसार  110 मजदूरों कि डिमांड किया गया है जिसके सापेक्ष 83 मजदूर दो साईट पर काम कर रहे हैं |

A P O  महोदय का कहना है कि उनके दौरे में कुल 39 लेबर काम पर मौजूद थे |

पंचायत स्तर से जिला स्तर तक इस गबन में कौन-कौन शामिल है ? क्या प्रशासन घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहा है?

मनरेगा जैसी योजनाओं में इस प्रकार के घोटाले गरीबों के अधिकारों पर सीधा हमला है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर दोषियों पर क्या कार्यवाही करता है या फिर यह भी पूर्व के मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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