नेपाल को निरंकुश राजशाही से मुक्ति दिलाने का सौभाग्य मुझे मिला” — पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड

रिपोर्ट परमात्मा प्रसाद उपाध्याय, बढ़नी (सिद्धार्थनगर)

नेपाल के तीन बार प्रधानमंत्री रह चुके, जनआंदोलनों के प्रणेता और माओवादी क्रांति के सूत्रधार पुष्प कमल दाहाल ‘प्रचंड’ ने कहा है कि “नेपाल को निरंकुश राजशाही की जंजीरों से आज़ाद कराने का कार्य हमने किया। यह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, एक युग परिवर्तन था।”

भारत-नेपाल सीमा से सटे सिद्धार्थनगर जनपद के बहादुरगंज में तराई-मधेश जागरण अभियान के अंतर्गत आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए श्री प्रचंड ने कहा, “हमने नेपाल को लोकतांत्रिक गणराज्य बनाया, संघीयता की नींव रखी, धर्मनिरपेक्षता का उद्घोष किया और सुशासन की स्थापना की।”

उन्होंने कहा कि वैश्विक मंचों पर नेपाल की छवि को सशक्त बनाना हो या फिर जलवायु संकट के मुद्दे पर वैश्विक नेतृत्व देना — उनकी सरकार ने हर मोर्चे पर निर्णायक भूमिका निभाई। “संयुक्त राष्ट्र महासचिव के साथ मैंने जलवायु संकट पर साझा मंच से दुनिया को संबोधित किया था, जो नेपाल के इतिहास में मील का पत्थर है।”

प्रचंड ने आत्ममंथन करते हुए कहा, “मैं अब सत्तर वर्ष का हो चुका हूँ, लेकिन देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति को देखकर ऐसा लगता है कि शायद अब फिर से एक महासंग्राम की आवश्यकता है। लोग सामंतवाद और अन्याय को नहीं भूले हैं — और न ही भूलेंगे।”

पूर्व प्रधानमंत्री ने करारा हमला करते हुए कहा कि आज नेपाल भ्रष्टाचार की दलदल में फंसा है। “किसानों को उनकी मेहनत का मूल्य नहीं मिल रहा, ईमानदार अधिकारियों को जबरन हटाया जा रहा है, और बिचौलिए व दलाल खुलेआम जनता का शोषण कर रहे हैं।” उन्होंने याद दिलाया कि उनके कार्यकाल में भू-माफियाओं के विरुद्ध अभियान चलाया गया था और भ्रष्टाचारियों पर शिकंजा कसा गया था।

उन्होंने दावा किया कि नागरिकता की समस्या का ऐतिहासिक समाधान उनके कार्यकाल में हुआ, जिसके तहत लाखों युवाओं को नागरिकता प्रदान की गई। भारत के साथ हुए विद्युत परियोजनाओं, कृषि व्यापार समझौतों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इनसे न केवल उत्पादन बढ़ा, बल्कि किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिला। नेपाल, भारत और बांग्लादेश के त्रिपक्षीय ऊर्जा समझौते को उन्होंने दीर्घकालिक विकास का प्रतीक बताया।

सभा में उपस्थित नवनियुक्त कार्यकर्ताओं का स्वागत करते हुए प्रचंड ने स्वीकार किया कि नेकपा एमाले और नेपाली कांग्रेस के साथ सरकार बनाना एक राजनीतिक भूल थी। उन्होंने कहा कि “इससे जनता में भ्रम फैला और पार्टी की छवि को नुकसान हुआ।”

अपनी पार्टी नेकपा माओवादी केंद्र को लेकर आश्वस्त प्रचंड ने कहा, “अब हमारी पार्टी फिर से शीर्ष की ओर बढ़ रही है। स्थानीय निकाय चुनावों में हमारे प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि हम किसी बैसाखी के मोहताज नहीं हैं। अगली सरकार हम अपने बलबूते बनाएंगे — और यह सरकार न्याय और जनहित की सरकार होगी।

प्रचंड का यह ओजस्वी भाषण न केवल अतीत की उपलब्धियों की पुनः पुष्टि थी, बल्कि एक नए आंदोलन की प्रस्तावना भी प्रतीत हो रहा था।