नेपाल – राजावादी नेताओं का ऐलान: प्रधानमंत्री भड़काने में लगे हैं, फिर भी हमारा आंदोलन रहेगा शांतिपूर्ण

परमात्मा उपाध्याय
बढ़नी, सिद्धार्थनगर।

राष्ट्रिय प्रजातन्त्र पार्टी (राप्रपा) के अध्यक्ष राजेन्द्र लिङ्देन ने कहा है कि आगामी २९ मई को काठमांडू में होने वाला राजावादी आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और अहिंसात्मक होगा, भले ही सरकार और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली इसे भड़काने में लगे हुए हों।

मंगलवार को संपादकों के साथ बातचीत के दौरान लिङ्देन ने प्रधानमंत्री पर आंदोलन को जानबूझकर भड़काने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “हमारा आंदोलन सत्याग्रह पर आधारित है, लेकिन सरकार इसे हिंसात्मक बनाने की कोशिश कर रही है। प्रधानमंत्री की हालिया अभिव्यक्तियां भड़काऊ रही हैं।”

लिङ्देन ने स्पष्ट किया कि राजसंस्था की पुनः स्थापना की मांग उनका संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि संविधान खुद नागरिकों को आलोचना और मांग रखने की छूट देता है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ओली ने हाल ही में कार्यकर्ताओं को २९ मई को काठमांडू को नियंत्रण में लेने का निर्देश दिया था, जिस पर मानव अधिकार आयोग ने भी आपत्ति जताई है। लिङ्देन ने इसे राज्य की ओर से आंदोलन को विफल करने का प्रयास बताया।

आंदोलन की तैयारियों के बीच राप्रपा नेपाल के अध्यक्ष कमल थापा ने कहा कि “अब सभी राजावादी, हिंदुवादी और राष्ट्रवादी ताकतें एकजुट हो चुकी हैं। यह आंदोलन निर्णायक होगा।” उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह विचारों को दबाने और नेताओं को देशद्रोह के झूठे मुकदमों में फँसाने की तैयारी कर रही है।

कार्यक्रम में वरिष्ठ नेता केशरसिंह विष्ट ने मीडिया से अपील की कि वह भड़काऊ बयानों के बावजूद आंदोलन की शांति बनाए रखने में सहयोग करे।

आंदोलन समिति के संयोजक नवराज सुवेदी ने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह अहिंसात्मक और निर्णायक होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए ‘काठमांडू कब्ज़ा’ के निर्देश को अलोकतांत्रिक और आपत्तिजनक बताया।

> आंदोलन की पृष्ठभूमि में सरकार और राजावादी नेताओं के बीच तनातनी चरम पर है, लेकिन राप्रपा का दावा है कि वह संविधान के दायरे में रहकर संघर्ष करेगी और जनता की भावनाओ का आदर करेगी।