नारायणीहिटी दरबार हत्याकांड: एक शाही परिवार की वो रात जब नेपाल कांप उठा

यह विशेष रिपोर्ट नेपाल के शाही परिवार के पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि स्वरूप समर्पित है — एक रात जो इतिहास बन गई, लेकिन सवाल छोड़ गई।

गुरु जी की कलम से | पुण्यतिथि विशेष रिपोर्ट

बढ़नी, सिद्धार्थनगर।
विक्रम संवत 2058 की जेठ 19 (1 जून 2001) की वह काली रात नेपाली इतिहास की सबसे भयावह और दर्दनाक रात बन गई। काठमांडू स्थित नारायणीहिटी राजमहल में एक पारिवारिक भोज के दौरान नेपाल के तत्कालीन शाही परिवार का लगभग संपूर्ण विनाश हो गया।

शाही भोज से शोकसभा तक: एक खून से लिखी गई रात

जिस शाम को प्रेम, अपनापन और परिवार की हंसी-ठिठोली से भरपूर होना था, वह चंद मिनटों में गोलियों की गूंज और चीखों में तब्दील हो गई।
राजा बीरेन्द्र, रानी ऐश्वर्या, राजकुमार निरंजन, राजकुमारी श्रुति और स्वयं युवराज दीपेन्द्र समेत कुल 10 राजपरिवार के सदस्य इस बर्बर गोलीकांड में मारे गए।

राजतंत्र डगमगाया, लोकतंत्र की दस्तक हुई

घटनाक्रम के अनुसार युवराज दीपेन्द्र इस गोलीकांड के मुख्य आरोपी माने गए, जिन्होंने कथित तौर पर नशे की हालत में इस हत्याकांड को अंजाम दिया और खुद को भी गोली मार ली।
उन्हें गम्भीर अवस्था में राजा घोषित किया गया, लेकिन तीन दिन बाद उनकी भी मृत्यु हो गई और ज्ञानेन्द्र शाह को नया राजा बनाया गया।

सरकारी जांच और जनता की शंका

सर्वोच्च न्यायाधीश और संसद अध्यक्ष की संयुक्त समिति ने जांच कर यह निष्कर्ष निकाला कि दीपेन्द्र ने मानसिक आघात में आकर यह कांड किया।
परंतु आज भी यह रिपोर्ट नेपाली जनमानस के लिए संतोषजनक नहीं है।
जनता के मन में अब भी सवाल हैं:

क्या यह केवल एक व्यक्ति की करतूत थी?

क्या राजमहल की सुरक्षा में लापरवाही थी या कुछ और छिपा है?

राजशाही से गणराज्य तक: सत्ता की करवट

इस घटना ने नेपाल की शाही व्यवस्था की नींव को हिला दिया।
2063 में राजा के अधिकार छीने गए और 2065 में नेपाल एक लोकतांत्रिक गणराज्य बना।
नारायणीहिटी दरबार अब एक संग्रहालय बन चुका है, लेकिन उसकी दीवारों में आज भी इतिहास की सिसकियाँ गूंजती हैं।

मौलाना मशहूद खान नेपाली का बयान: “अब सच्चाई को सामने लाना होगा”

माओवादी केन्द्र लुंबिनी प्रदेश समिति के सदस्य मौलाना मशहूद खान नेपाली ने कहा: यह केवल इतिहास नहीं, आज भी जलता हुआ जख्म है। असली कातिल कौन हैं, यह अब भी अनसुलझा रहस्य है। यदि नेपाल को सच्चे लोकतंत्र की दिशा में आगे ले जाना है, तो इस अध्याय की परतें पूरी तरह खोलनी होंगी।