📅 Published on: June 2, 2025
Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर।
बसपा के पूर्व जिला महासचिव शमीम अहमद ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “पूरे प्रदेश सहित सिद्धार्थनगर जनपद में सरकार की बुलडोजर नीति का शिकार सिर्फ मस्जिदें और मदरसे क्यों बन रहे हैं? क्या सरकार की नजर में सिर्फ एक ही धर्म के धार्मिक स्थल अवैध हैं?”
उन्होंने कहा कि भारत का संविधान बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा सभी धर्मों को समान अधिकार देने की बुनियाद पर बनाया गया है। प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म के अनुसार धार्मिक स्थल स्थापित करने की स्वतंत्रता दी गई है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा केवल मस्जिदों और मदरसों को निशाना बनाना एकतरफा कार्यवाही को दर्शाता है।
“सैकड़ों सालों से अस्तित्व में रहे मस्जिदों और मदरसों को अवैध ठहराकर जिस तरह से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है, वह न केवल संविधान विरोधी है, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन भी है,” शमीम अहमद ने कहा।
उन्होंने जानकारी दी कि इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल की गई है, जिसमें गैर मान्यता प्राप्त मदरसों पर बिना विधिक आधार के की जा रही कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है।
शमीम अहमद ने सर्वोच्च न्यायालय और उत्तर प्रदेश शासन के विशेष सचिव से अपील की कि मस्जिदों और मदरसों को लेकर की जा रही कार्यवाही को तत्काल प्रभाव से रोका जाए और संवैधानिक प्रावधानों के तहत निष्पक्ष जांच कर न्यायोचित निर्णय लिया जाए।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब हजारों अवैध निर्माण और कब्जे अन्य समुदायों के भी हैं, तो सिर्फ धर्म विशेष के धार्मिक स्थलों को ही टारगेट क्यों किया जा रहा है? यदि सरकार को अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करनी है तो वह सभी के लिए एक समान होनी चाहिए।
“अगर सरकार की नीयत साफ है तो फिर कार्यवाही का पैमाना एकतरफा क्यों?”
यह सवाल अब आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।
बताते चलें कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर अक्सर यह आरोप लगाया जाता है कि उसका राजनीतिक आधार मुस्लिम विरोध पर टिका है। आलोचकों का कहना है कि भाजपा अपने हिंदुत्व एजेंडे को मजबूत करने के लिए मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाती है। चुनावी भाषणों, गोरक्षा के नाम पर हिंसा, सीएए-एनआरसी जैसे मुद्दों और मस्जिद-मदरसों पर कार्रवाई को इसके उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया जाता है। हालांकि भाजपा खुद को सबका साथ, सबका विकास की पार्टी बताती है, लेकिन उसके कई नेताओं के बयान समुदाय विशेष के खिलाफ माहौल बनाते हैं। यह भी कहा जाता है कि भाजपा की राजनीति ‘ध्रुवीकरण’ पर आधारित है, जिससे उसे वोट बैंक की राजनीति में लाभ मिलता है। धर्मनिरपेक्ष संविधान में ऐसी नीतियां चिंता का विषय हैं। लोकतंत्र में किसी भी पार्टी का अस्तित्व सभी नागरिकों के अधिकारों के सम्मान पर आधारित होना चाहिए। मुसलमान भी इस देश के बराबरी के नागरिक हैं, और उनकी धार्मिक, सामाजिक स्वतंत्रता का हनन नहीं किया जाना चाहिए। भाजपा को चाहिए कि वह विकास की राजनीति करे, न कि धार्मिक ध्रुवीकरण की।