📅 Published on: July 3, 2025
Kapilvastupost
त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के एक गाँव में 40 वर्षीय व्यक्ति द्वारा 17 वर्षीय नाबालिग के साथ किए गए दुष्कर्म के मामले ने पुलिस की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पीड़िता द्वारा जब इस कुकृत्य की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए पुलिस स्टेशन में तहरीर दी गई, तो उसे डांटकर भगा दिया गया। यह घटना स्पष्ट करती है कि जब पीड़ित न्याय की तलाश में पुलिस के पास पहुंचता है, तो उसे केवल अनसुना किया जाता है।
क्या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है कि वह ऐसे गंभीर मामलों में त्वरित कार्रवाई करें और उचित जांच करें? आरोपियों को सजा दिलाने के लिए जितनी तेजी से कार्यवाही होनी चाहिए, उतनी ही जिम्मेदारी पुलिस की बनती है कि वह पीड़ित की बातें सुने और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करे। यह समझ से परे है कि जब कोई पीड़ित अपने दर्द और संघर्ष के साथ पुलिस के पास आता है, तो उसे सुनने और संतुष्ट करने की बजाय उसे वापस लौटा दिया जाता है।
यह घटना सिर्फ इस बात का संकेत है कि हमारे समाज में कितनी विकृतियाँ और असमानताएँ मौजूद हैं। पुलिस प्रशासन को यह समझना चाहिए कि पीड़ित के प्रति संवेदनशीलता सिर्फ एक नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि कानूनी आवश्यकता भी है। उन्हें शिकायतों का गंभीरता से लेना चाहिए और पीड़ितों के समक्ष उपस्थित समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना चाहिए।
हमें यह सवाल करना चाहिए कि आखिर पुलिस ऐसे मामलों में इतनी निष्क्रियता क्यों दिखाती है? क्या विभाग के अंदर सुधार की आवश्यकता नहीं है? यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे हमें गंभीरता से उठाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में किसी और का अधिकार न छिना जाए और सभी को न्याय मिले।