धान रोपाई में मजदूरों की किल्लत, फिर भी मनरेगा में फर्जी हाजिरी! बीडीओ ने दिए सख्त निर्देश

गुरु जी की कलम से

बढ़नी, सिद्धार्थनगर।
विकास खंड बढ़नी क्षेत्र की कुछ ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत फर्जी हाजिरी लगाकर भ्रष्टाचार किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। कपिलवस्तुपोस्ट न्यूज की खबरों का संज्ञान लेते हुए खंड विकास अधिकारी अनीशि मणि पांडे ने मामले को गंभीरता से लिया है और सभी ग्राम पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक और रोजगार सेवकों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

जानकारी के अनुसार, इन ग्राम पंचायतों में ई-मस्टररोल जारी कर कार्यस्थल पर श्रमिकों की उपस्थिति दिखाकर फोटो व एमएमएस मैप के माध्यम से मनरेगा की फर्जी हाजिरी भरी जा रही थी, जबकि वास्तव में कार्य स्थल पर कोई श्रमिक मौजूद नहीं था।

बीडीओ द्वारा जारी पत्रांक संख्या 510/लेखा सं. मनरेगा/शिकायत/2025-26 दिनांक 18 जुलाई 2025 में कहा गया है कि यह प्रक्रिया मनरेगा अधिनियम के विरुद्ध है और वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आती है। यदि किसी पंचायत में ऐसा दोहराया गया, तो संबंधित रोजगार सेवक पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तय है।

अब सवाल ये उठता है:

इन दिनों पूरे क्षेत्र में धान की रोपाई का सीजन चल रहा है। मजदूरी की दर औसतन 400 रुपये प्रतिदिन तक पहुंच चुकी है। कई गांवों में तो बिहार से मजदूर बुलाकर रोपाई कराई जा रही है, जिससे साफ है कि स्थानीय स्तर पर मजदूरों की भारी कमी है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब असल खेतों में मजदूर नहीं मिल रहे, तो मनरेगा में 250 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी पर काम करने वाले ये सैकड़ों मजदूर आखिर आ कहां से रहे हैं?

यह विसंगति इस पूरे मामले की जड़ पर सवाल खड़ा करती है — क्या यह एक योजनाबद्ध फर्जीवाड़ा है?

बीडीओ ने यह भी स्पष्ट किया है कि बरसात और खेतों में धान की रोपाई के चलते वास्तविक रूप से मनरेगा के तहत निर्माण कार्य कराना वर्तमान समय में संभव नहीं है। फिर भी यदि कार्य दिखाया जा रहा है, तो वह सीधे तौर पर धोखाधड़ी है।

अब देखना यह है कि जांच के बाद इस फर्जीवाड़े में कौन-कौन जिम्मेदार निकलते हैं और उन पर क्या कार्रवाई होती है।