📅 Published on: October 1, 2025
Kapilvastupost
बांसी, सिद्धार्थ नगर। जहां एक ओर केंद्र और प्रदेश की डबल इंजन की सरकार विकास कार्यों में पारदर्शिता के तमाम दावे करती है, वहीं सिद्धार्थ नगर जिले के बांसी ब्लॉक की भवांरी ग्राम पंचायत में ये दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। यहां इंटरलाकिंग सड़क के निर्माण में मानकों को ताक पर रखकर खुलेआम भ्रष्टाचार किया जा रहा है।
खेतों की मिट्टी से हो रहा इंटरलॉकिंग निर्माण
ग्रामीणों के अनुसार, भवांरी गांव में जुग्गुर के घर से कतारू के घर तक बन रही इंटरलॉकिंग सड़क में गंभीर अनियमितताएं बरती जा रही हैं। सड़क निर्माण में बालू (रेत) के स्थान पर खेतों की मिट्टी डाली जा रही है, जो कि निर्माण मानकों का सीधा उल्लंघन है। ग्रामीणों ने बताया कि निर्माण कार्य भी बहुत धीमी गति से हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि इंटरलॉकिंग में बालू की जगह मिट्टी डालने का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन यहां यही किया जा रहा है। इसका सीधा खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है, क्योंकि मानक विहीन ढंग से बनी ये सड़कें जल्द ही टूट जाती हैं।
लाखों का फर्जी भुगतान और भ्रष्टाचार का अड्डा
मामले को और गंभीर बनाते हुए, यह आरोप भी लगाया गया है कि इंटरलॉकिंग कार्य में कम मटेरियल लगाकर भी लाखों रुपयों का भुगतान एक फर्जी फर्म को कर दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि इस भुगतान में प्रधान और सचिव का हस्ताक्षर-मुहर तथा तारीख भी अंकित नहीं है।
शिकायतकर्ता रितिक श्रीवास्तव ने आरोप लगाया है कि भवांरी ग्राम पंचायत में ₹500 के सामान का एस्टीमेट ₹3000 का बनाकर, फर्जी बिल-बाउचर भरकर सरकारी धन का खुलेआम ‘बंदरबांट’ किया गया है।
भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई से कतराने का आरोप
शिकायतकर्ता रितिक श्रीवास्तव ने इन तमाम भ्रष्टाचारों की शिकायत उच्च अधिकारियों से भी की है, लेकिन आरोप है कि भवांरी ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी इस पर कार्रवाई करने में कतराते हैं।
फिलहाल, भवांरी ग्राम पंचायत भ्रष्टाचार का अड्डा बनी हुई है, जहां सरकारी धन का दुरुपयोग करके, गुणवत्ता से खिलवाड़ करते हुए सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। यह मामला उच्च स्तरीय जांच का विषय है ताकि जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सके और विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।