शादी के दो दिन पहले ग़रीब पिता ने मौत को गले लगाया: “अब बेटी का हाथ पीला कौन करेगा?”

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शोहरतगढ़, सिद्धार्थनगर। नगर पंचायत शोहरतगढ़ के वार्ड श्रीराम जानकी नगर में बेटी की शादी की खुशियों के बीच एक ऐसी हृदय विदारक घटना हुई है, जिसने पूरे मोहल्ले को स्तब्ध कर दिया है। संविदा पर सफाई कर्मी अर्जुन पचास वर्ष ने अपनी बेटी के हाथ पीले होने से महज़ दो दिन पहले, शुक्रवार की रात घर के अंदर फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।

पिता के इस कदम ने गरीबी और शायद शादी के बोझ से उपजे मानसिक तनाव की ओर इशारा किया है।

​रविवार को जिस घर में शहनाई बजनी थी, आज वहां सिर्फ चीख-पुकार और मातम पसरा है। परिवार और रिश्तेदारों में दो दिन से शादी की जो रौनक थी, वह एक झटके में बेरंग हो गई। भोजन करने के बाद अपने कमरे में गए अर्जुन ने जब देर रात तक कोई हलचल नहीं की, तो परिजनों को शक हुआ। अंदर का दृश्य देख उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई—अर्जुन का शव रस्सी के फंदे से छत की कुंडी से लटका हुआ था।

​रोने-धोने की आवाज़ सुनकर आसपास के लोग इकट्ठा हो गए। मृतक की पत्नी और बेटी की हृदय विदारक चीत्कार सुनकर हर किसी की आँखें नम हो गईं। बिलखती माँ बार-बार यही कह रही थी, “अपना तो बेटी को बिदा करने से पहले बिदा हो गए। अब बेटी का हाथ पीला कैसे होगा? उसका कन्यादान कौन करेगा?” इन चंद शब्दों में एक ग़रीब परिवार की टूटी हुई उम्मीदें और पिता के अचानक चले जाने का गहरा दुख साफ झलक रहा था।

​अर्जुन अपने पीछे पत्नी और चार बेटियों को छोड़ गए हैं, जिनमें से एक की शादी होनी थी। इस घटना ने एक बार फिर समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आख़िर एक पिता को अपनी सबसे बड़ी ख़ुशी के मौके पर ऐसा आत्मघाती कदम क्यों उठाना पड़ा। कहीं इसके पीछे आर्थिक तंगी और सामाजिक दबाव तो नहीं?

​सूचना पाकर मौके पर पहुँची पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन यह सवाल मोहल्ले के हर व्यक्ति के मन में गूंज रहा है कि अब इस परिवार का क्या होगा और बेटी की शादी की ज़िम्मेदारी कौन उठाएगा। अर्जुन की मौत ने खुशियों को मातम में बदल दिया है और पीछे छोड़ गई है मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला एक अनसुलझा दर्द।