📅 Published on: December 19, 2025
खाद की कालाबाजारी पर भड़के किसान, बीडीओ के आश्वासन से भी नहीं शांत हुआ आक्रोश
Kapilvastupost
शोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर): सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई शोहरतगढ़ के डोहरिया खुर्द में साफ नजर आ रही है। जहाँ एक ओर सरकार किसानों को उचित दाम पर खाद उपलब्ध कराने के दावे कर रही है, वहीं बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति लिमिटेड, डोहरिया खुर्द भ्रष्टाचार और मनमानी का अड्डा बन चुकी है।
यहाँ के सचिव शेषराम पर सरकार द्वारा निर्धारित दरों की धज्जियां उड़ाने और किसानों से अवैध वसूली करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
अधिकारियों की नाक के नीचे खुली लूट
हैरानी की बात यह है कि जब खाद वितरण के दौरान खंड विकास अधिकारी (BDO) शोहरतगढ़ मौके पर पहुंचे, तब किसानों ने सीधे उनसे सचिव की शिकायत की। किसानों का आरोप है कि सचिव शेषराम ने खुलेआम तय कीमत से अधिक पैसे वसूल रहे हैं।
लेकिन, बीडीओ की मौजूदगी के बावजूद सचिव की मनमानी पर तत्काल कोई सख्त कार्रवाई न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गहरा सवाल खड़ा करता है।
किसानों का बड़ा सवाल: आखिर किसके संरक्षण में सचिव नियमों की अनदेखी कर रहे हैं? क्या उच्च अधिकारियों की शह पर ही गरीब किसानों का गला रेता जा रहा है?
अभद्रता और अनियमितता का पुराना इतिहास
ग्रामीणों ने बताया कि यह कोई पहली बार नहीं है। सचिव पर पूर्व में भी किसानों के साथ गाली-गलौज और अभद्रता करने के आरोप लग चुके हैं। बावजूद इसके, संबंधित विभाग और प्रशासन की चुप्पी किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा काम कर रही है।
किसानों का कहना है कि वे आश्वासन की घुट्टी पीते-पीते थक चुके हैं और अब उन्हें ठोस कार्रवाई चाहिए।
आंदोलन की राह पर अन्नदाता
पीड़ित किसानों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कर दोषी सचिव को हटाया नहीं गया और वसूली बंद नहीं हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। न्याय न मिलने की स्थिति में किसान तहसील और जिला मुख्यालय पर बड़ा आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे।
व्यवस्था पर उठते गंभीर सवाल:
* क्या सरकारी समितियों में बैठे सचिव अब सरकार के नियमों से ऊपर हो गए हैं?
बीडीओ जैसे उच्च अधिकारियों की उपस्थिति के बाद भी कार्रवाई का न होना क्या ‘मिलीभगत’ का संकेत है?
जिले का सहकारिता विभाग किसानों के हितों की रक्षा करने में विफल क्यों साबित हो रहा है?
अब देखना यह है कि सिद्धार्थनगर जिला प्रशासन और सहकारिता विभाग इस ‘सिंडिकेट’ को तोड़ता है या किसानों की मेहनत की कमाई यूं ही लुटती रहेगी।