निजी खाद विक्रेताओं ने खोला मोर्चा: प्रशासन पर लगाया उत्पीड़न और भेदभाव का आरोप

निजाम अंसारी
सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के निजी उर्वरक विक्रेताओं ने प्रशासन की कार्यप्रणाली के खिलाफ गहरा रोष व्यक्त किया है। ‘उर्वरक फुटकर विक्रेता वेलफेयर एसोसिएशन’ ने महामहिम राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपकर आरोप लगाया है कि राजस्व विभाग के माध्यम से निजी दुकानदारों का मानसिक और आर्थिक शोषण किया जा रहा है।

प्रमुख शिकायतें और आरोप:
एसोसिएशन का कहना है कि प्रशासन केवल निजी दुकानों की जांच कर उनके लाइसेंस निलंबित कर रहा है, जबकि सरकारी समितियों (Co-operative societies) में हो रही कथित अनियमितताओं और ‘ओवररेटिंग’ पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

यूरिया की किल्लत और ऊंचे दाम: पत्र में दावा किया गया है कि निजी दुकानदार यूरिया के लिए दर-दर भटक रहे हैं। उन्हें यूरिया की बोरी ₹300 के ऊंचे दामों पर मिल रही है, जिससे व्यापार करना मुश्किल हो गया है।

प्रशासनिक उत्पीड़न: आरोप है कि राजस्व विभाग के अधिकारियों को जांच में लगाकर छोटे-बड़े फुटकर दुकानदारों को बेवजह परेशान किया जा रहा है।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों—आदर्श कुमार श्रीवास्तव (प्रदेश अध्यक्ष), ओमकार त्रिपाठी और नीरज कुमार वर्मा—ने मांग की है कि जांच की प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए। उनका कहना है कि सरकारी समितियों की भी सघन जांच हो और निजी दुकानदारों को उचित मूल्य पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए ताकि वे अपनी दुकानदारी सुचारू रूप से चला सकें।