सिद्धार्थनगर: कड़ाके की ठंड में ठिठुर रहे लोग, नगर पंचायत बिस्कोहर में अलाव की व्यस्था नहीं

Niyamtullah khan

सिद्धार्थनगर जिले के बिस्कोहर नगर पंचायत में कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। आलम यह है कि जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है, लेकिन नगर पंचायत प्रशासन की संवेदनहीनता के कारण अभी तक कहीं भी अलाव की व्यवस्था नहीं की गई है। गरीब, मजदूर और राहगीर ठिठुरने को मजबूर हैं, जबकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायत के बावजूद अधिकारी कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट: ठिठुरती जनता, लापरवाह प्रशासन बिस्कोहर नगर पंचायत क्षेत्र में ठंड ने आम जनजीवन की रफ्तार थाम दी है। बाजारों से लेकर मुख्य चौराहों तक लोग ठंड से कांप रहे हैं। सबसे बुरा हाल उन गरीब मजदूरों, रिक्शा चालकों और ठेला व्यापारियों का है, जिन्हें काम के सिलसिले में पूरी रात और सुबह सड़कों पर गुजारनी पड़ती है। शासन स्तर से बजट जारी होने की चर्चाओं के बीच धरातल पर अलाव न जलना प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर रहा है।

क्षेत्र के जनप्रतिनिधि राजा अंसारी (समाजसेवी) ने कहा हर साल प्रमुख चौराहों, बस स्टैंड और अस्पताल परिसर में अलाव जलते थे। लेकिन इस साल नगर पंचायत पूरी तरह बेपरवाह दिख रही है। रात में राहगीरों की हालत दयनीय हो जाती है।

वहीं स पा नेता देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा हमने ईओ (EO) अखिलेश दीक्षित और एसडीएम इटवा से इस मामले में शिकायत की है। बजट होने के बावजूद जनता को राहत क्यों नहीं दी जा रही? यह प्रशासन की बड़ी विफलता है।

स्थानीय नागरिक एजाज अहमद का कहना है कि ठंड से बचाव के कोई इंतजाम नहीं हैं। ऐसा लगता है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।

बताते चलें कि प्रमुख स्थलों की अनदेखी: बस स्टैंड, अस्पताल और मुख्य बाजारों में अलाव की कोई कोई व्यवस्था नहीं।
बजट पर सवाल: ग्रामीणों का आरोप है कि शासन से धन आवंटित होने के बाद भी अलाव की व्यवस्था नहीं हुई।

अधिकारियों की चुप्पी: ईओ और एसडीएम को अवगत कराने के बाद भी अब तक धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं दिखी।

अब बड़ा सवाल यह है कि बिस्कोहर नगर पंचायत प्रशासन की नींद कब खुलेगी? क्या जिम्मेदार अधिकारी ऑफिसों के बंद कमरों से बाहर निकलकर इस कड़ाके की ठंड में ठिठुर रही जनता की सुध लेंगे? क्षेत्र की जनता अब प्रशासन से जल्द से जल्द राहत की उम्मीद कर रही है।