📅 Published on: December 21, 2025
एक अस्पताल शोहरतगढ़ में और एक पकड़ी और बभनी में विभागीय संरक्षण फलने फूलने की चर्चा है।
गुरु जी की कलम से
सिद्धार्थनगर। जिले के स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हेंपुर स्थित ‘श्री साईं फार्मा क्लीनिक’ में एक नवजात शिशु की मौत और कथित अवैध ऑपरेशन के मामले ने विभाग की सुस्त कार्यशैली की पोल खोलकर रख दी है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसकी शह पर बिना वैध मानकों के जिले में ऐसे क्लीनिक फल-फूल रहे हैं?
DM के आदेश के बाद हरकत में आया विभाग
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने स्वयं संज्ञान लिया, जिसके बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. रजत कुमार चौरसिया ने आनन-फानन में जांच के आदेश दिए। हैरानी की बात यह है कि जब तक पीड़ित परिवार ने गुहार नहीं लगाई और उच्चाधिकारियों ने हस्तक्षेप नहीं किया, तब तक स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन को इस अवैध गतिविधि की भनक तक नहीं लगी।
जांच के घेरे में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका
इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग पर कई तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं:
पंजीकरण का खेल: क्या विभाग को जानकारी नहीं थी कि उक्त क्लीनिक सिर्फ ओपीडी (OPD) के लिए पंजीकृत था? यदि हाँ, तो वहां डिलीवरी और ऑपरेशन जैसी जटिल प्रक्रियाएं कैसे की जा रही थीं?
निरीक्षण का अभाव: जिले के नोडल अधिकारी और स्वास्थ्य निरीक्षक क्या सिर्फ कागजों पर ही क्लीनिकों का निरीक्षण करते हैं?
अवैध अस्पतालों का जाल: जिले में पहले भी ‘फर्जी डिग्री’ और ‘अवैध अस्पतालों’ के मामले सामने आ चुके हैं, बावजूद इसके विभाग ने कोई ठोस प्रिवेंटिव एक्शन क्यों नहीं लिया?
शिकायत मिलने के बाद ही जागना विभाग की नियति बन चुकी है। अगर समय रहते इन फर्जी क्लीनिकों पर छापेमारी की गई होती, तो आज एक मासूम की जान बचाई जा सकती थी।” — स्थानीय नागरिक
क्या होगी कार्रवाई?
वर्तमान में अधीक्षक डॉ. सुबोध चन्द्र को प्राथमिक जांच सौंपी गई है। जांच में क्लीनिक की वैधता, ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर की डिग्री और स्टाफ की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। अब देखना यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग अपनी कमियों को स्वीकार करते हुए दोषियों पर कठोर कार्रवाई करेगा या फिर हर बार की तरह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।