📅 Published on: December 29, 2025
गुरु जी की कलम से
बढ़नी, सिद्धार्थनगर।
उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर शासन-प्रशासन स्तर पर मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य जोरों पर है। लेकिन सिद्धार्थनगर जिले के विकासखंड बढ़नी से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने विभागीय कर्मचारियों की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
यहाँ कर्मचारियों के एक ‘नये कारनामे’ के तहत ग्राम पंचायत की वर्तमान प्रधान का नाम ही मतदाता सूची से साफ कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला विकासखंड बढ़नी के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत भावपुर उर्फ गुलरी का है। गाँव में जब नई मतदाता सूची पहुंची, तो उसे देखकर ग्रामीण और स्वयं प्रधान प्रतिनिधि दंग रह गए। सूची से वर्तमान महिला ग्राम प्रधान सुनर पाती का नाम ही नदारद है।
सिस्टम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
यह खबर क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब गांव की प्रथम नागरिक और वर्तमान प्रधान का नाम ही मतदाता सूची से गायब हो सकता है, तो फिर आम और भोली-भाली जनता के नामों की सुरक्षा की क्या गारंटी है?
यह लापरवाही दर्शाती है कि सूची तैयार करने वाले कर्मचारियों ने धरातल पर उतरकर काम करने के बजाय केवल कागजी खानापूर्ति की है।
तहसील से ब्लॉक तक की दौड़
अपना नाम दोबारा सूची में शामिल करवाने के लिए वर्तमान प्रधान को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। वे विकासखंड कार्यालय से लेकर तहसील मुख्यालय तक के चक्कर काट रही हैं, लेकिन विडंबना देखिए कि समाचार लिखे जाने तक उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं किया जा सका है।
मताधिकार पर मंडराता खतरा
यदि समय रहते इस गड़बड़ी को सुधारा नहीं गया, तो न केवल वर्तमान प्रधान बल्कि गांव के कई अन्य पात्र मतदाता भी अपने संवैधानिक अधिकार (वोट देने के अधिकार) से वंचित रह सकते हैं। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस घोर लापरवाही के जिम्मेदार कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और जल्द से जल्द त्रुटिहीन सूची जारी की जाए।