📅 Published on: January 1, 2026
Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर: जन सूचना देने में टालमटोली और लापरवाही बरतना जनपद के अधिकारियों को भारी पड़ गया है। राज्य सूचना आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए सिद्धार्थनगर के एडीएम सहित 35 अधिकारियों पर भारी अर्थदंड लगाया है। साथ ही, महत्वपूर्ण सरकारी अभिलेख गायब होने के मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज करने के भी आदेश दिए हैं।
कार्यवाही का आधार: समय सीमा के भीतर सूचना उपलब्ध न कराना।
कुल मामले: 29 मामलों की सुनवाई (27 सिद्धार्थनगर, 2 बस्ती)।
जुर्माना: 35 अधिकारियों पर प्रति व्यक्ति ₹25,000 का अर्थदंड।
विशेष निर्देश: गायब दस्तावेजों के लिए प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) के आदेश।
राज्य सूचना आयुक्त का सख्त फैसला
30 दिसंबर को राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम ने आरटीआई कार्यकर्ता देवेश मणि त्रिपाठी द्वारा दायर अपीलों पर सुनवाई की। देवेश मणि ने विकास एवं सिंचाई विभाग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी थीं, जिन्हें अधिकारियों ने समय पर उपलब्ध नहीं कराया था। सुनवाई के दौरान सूचना आयुक्त ने पाया कि अधिकारी अपने दायित्वों के प्रति लापरवाह रहे हैं।
इन अधिकारियों पर गिरी गाज
आयोग ने एडीएम गौरव श्रीवास्तव सहित सिंचाई, स्वास्थ्य और विकास विभाग के कई बड़े चेहरों पर जुर्माना ठोंका है।
दंडित अधिकारियों की सूची में मुख्य रूप से शामिल हैं:
प्रशासनिक अधिकारी: एडीएम गौरव श्रीवास्तव, बीडीओ नौगढ़ सर्वेश मोहन।
* अभियंता: अधिशासी अभियंता (सिंचाई) सतीश कुमार, अधिशासी अभियंता (ड्रेनेज) शैलेंद्र कुमार चौधरी।
* अन्य: सीडीपीओ अरशद, अधीक्षक (CHC उस्का बाजार व शोहरतगढ़), अधिशासी अधिकारी (नगर पंचायत इटवा व सिद्धार्थनगर)।
ग्राम पंचायत सचिव: आशुतोष यादव, विमलकांत यादव, वशी कुर्रहमान, शीला पटेल और राहुल यादव।
गायब फाइलों पर दर्ज होगी FIR
मामला केवल जुर्माने तक ही सीमित नहीं रहा। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग से संबंधित चार मामलों में रिकॉर्ड गायब होने पर आयोग ने कड़ी नाराजगी जताई। सूचना आयुक्त ने अधिशासी अभियंता को आदेश दिया है कि:
* जो अभिलेख गायब हैं, उनके विरुद्ध तत्काल प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराई जाए।
* अपूर्ण अभिलेखों और विलंब के संबंध में विस्तृत विवरण शपथ-पत्र के माध्यम से प्रस्तुत किया जाए।