सिद्धार्थ नगर – भवांरी ग्राम पंचायत में विकास के नाम पर ‘लूट’: पुरानी ईंटों पर बिछाई इंटरलॉकिंग, सचिव और प्रधान पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

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सिद्धार्थनगर: विकासखंड बांसी के ग्राम पंचायत भवांरी में सरकारी धन के बंदरबांट का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान और सचिव की जुगलबंदी ने मानक और गुणवत्ता को ताक पर रखकर सरकारी खजाने को जमकर चूना लगाया है।

पुरानी ईंटों का खेल और मानकों की अनदेखी

सूत्रों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, सुदामा के घर से नोखई यादव के घर तक कराई गई इंटरलॉकिंग में जमकर धांधली की गई है। आरोप है कि इंटरलॉकिंग के नीचे डाली जाने वाली सामग्री (रोड़ा) के नाम पर पुरानी ईंटों का इस्तेमाल कर महज रस्म अदायगी की गई। हद तो तब हो गई जब पहले से लगी हुई इंटरलॉकिंग ईंटों के ऊपर ही नई ईंटें बिछा दी गईं, ताकि दोबारा भुगतान कराया जा सके।

अधूरे कार्य और फर्जी बिल-वाउचर का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कूड़ा घर आज भी अधूरा पड़ा है, लेकिन कागजों पर उसे पूर्ण दिखाकर भुगतान निकालने की तैयारी है। आरोप है कि कम मूल्य की सामग्री खरीदकर फर्जी फर्मों के माध्यम से ज्यादा मूल्य के बिल-वाउचर लगाए गए हैं।

अधिकारियों की चुप्पी और ‘बिना आईडी’ काम का रहस्य

जब स्थानीय निवासी रितिक श्रीवास्तव ने इस मानक विहीन कार्य का विरोध किया, तो सचिव शेषदत्त मिश्रा का अजीबोगरीब बयान सामने आया। सचिव के अनुसार, कार्य का न तो एमबी (Measurement Book) हुआ है और न ही आईडी बनी है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि बिना प्रशासनिक स्वीकृति और आईडी के धरातल पर निर्माण कार्य कैसे शुरू हो गया?

जिलाधिकारी से जांच की मांग

मामले की गंभीरता को देखते हुए रितिक श्रीवास्तव ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपा है। उन्होंने मांग की है कि उच्चाधिकारियों की एक टीम गठित कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराई जाए, ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो सके। ग्रामीणों का मानना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई, तो भ्रष्टाचार का एक बड़ा सिंडिकेट उजागर होगा।