पांच वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के अपराध में दुष्कर्मी को बीस वर्ष का कठोर कारावास

D K Srivastav

Legal Reporter

सिद्धार्थनगर। विशेष अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट वीरेन्द्र कुमार की अदालत ने पांच वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म करने के अपराध में अभियुक्त महादेव पुत्र स्व. रामसमुझ को साक्ष्यों के आधार दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है साथ ही उसके ऊपर दस हजार रुपए का अर्थदंड भी अधिरोपित किया है। वह डुमरियागंज थानाक्षेत्र के साकिन माली मैनहा का रहने वाला है।

घटना डुमरियागंज थानाक्षेत्र के एक गांव में 11 सितंबर 2025 को घटित हुई थी। अभियोजन कथानक के अनुसार पीड़िता बच्ची की मामी ने पुलिस को तहरीर देते हुए कहा कि उसकी पांच वर्षीय बच्ची 11 सितंबर 2025 की शाम करीब 5 बजे उसकी भांजी घर के बगल बागीचे में खेल रही थी। उसी वक्त महादेव पुत्र रामसमुझ उसकी भांजी को 10 रूपये देने का लालच देकर छेड़खानी करते हुए गोद में उठाकर ले जाने लगा तभी बागीचे में मौजूद गांव वालों व बच्चों के शोर करने पर महादेव उसकी भांजी को छोड़कर भाग गया।

पुलिस ने केस दर्ज करके बच्ची का चिकित्सकीय परीक्षण करवाया और न्यायालय में बयान दर्ज करवाया। अभियुक्त को गिरफ्तार करके न्यायालय के समक्ष पेश किया जिसे न्यायालय ने जेल भेज दिया। विवेचना के बाद पुलिस ने अभियुक्त के खिलाफ 12 वर्ष से कम उम्र की बच्ची के साथ दुष्कर्म एवं पॉक्सो एक्ट के अपराध में आरोप पत्र दाखिल किया।

न्यायालय ने घटना का संज्ञान लेकर अभियुक्त के विरुद्ध आरोप तय किया जिससे उसने इंकार करते हुए विचारण की मांग किया। न्यायालय ने विचारण शुरू किया और साक्ष्यों का परीक्षण किया।

विचारण की समाप्ति पर न्यायालय ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनकर पत्रावली का सम्यक परिशीलन करके पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों गवाहों की गवाही, जिरह, चिकित्सकीय परीक्षण रिपोर्ट, एफआईआर, केस डायरी एवं अन्य सुसंगत दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर दोषी ठहराते हुए सजा के बिंदु पर सुनवाई करके दोषसिद्ध अभियुक्त को बीस वर्षों के कठोर कारावास की सजा सुनाया और उसके ऊपर दस हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया।

अर्थदंड अदा ना करने की दशा में उसको एक वर्ष के अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी। न्यायालय ने आदेशित किया कि अर्थदंड की 90 फीसदी धनराशि पीड़िता को बतौर प्रतिकर प्रदान किया जाए साथ ही यह भी आदेशित किया कि पीड़िता राहत एवं पुनर्वास हेतु अधिकतम क्षतिपूर्ति राज्य सरकार से भी प्राप्त करने की अधिकारी है अतः निर्णय की प्रति डीएलएसए को क्षतिपूर्ति प्रदान किये जाने के सम्बन्ध में प्रेषित की जाये।

पीड़ित पक्ष की पैरवी राज्य सरकार की तरफ से नियुक्त विशेष लोक अभियोजक पवन कुमार कर पाठक ने किया।