📅 Published on: May 15, 2026
सिद्धार्थनगर में जिला अध्यक्ष निशात अली की अगुवाई में कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन, राणे पर UAPA लगाने और मंत्री पद से बर्खास्त करने की मांग
Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर (15 मई 2026):** महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और विधायक नितेश राणे द्वारा ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ दिए गए कथित विवादित और अमर्यादित बयान को लेकर देश भर में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में आज शुक्रवार को AIMIM सिद्धार्थनगर जिला इकाई के *जिला अध्यक्ष निशात अली* की अध्यक्षता में पार्टी कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया।
कार्यकर्ताओं ने जिला अधिकारी (DM) के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति महोदया एवं भारतीय चुनाव आयोग को संबोधित एक छह सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।
AIMIM नेताओं ने मांग की है कि नितेश राणे के खिलाफ यूएएपीए (UAPA) के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें तत्काल प्रभाव से महाराष्ट्र मंत्रिमंडल और विधानसभा की सदस्यता से बर्खास्त किया जाए।
संविधान और लोकतंत्र का खुला अपमान
सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि भारत का संविधान देश के हर नागरिक, धर्म और वैधानिक राजनीतिक दल को समान अधिकार और लोकतांत्रिक भागीदारी की गारंटी देता है। लेकिन यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि महाराष्ट्र सरकार में मंत्री जैसे जिम्मेदार संवैधानिक पद पर बैठे नितेश राणे लगातार संविधान विरोधी, समाज को बांटने वाले और सांप्रदायिक उन्माद फैलाने वाले बयान दे रहे हैं।
विभिन्न राष्ट्रीय समाचार पत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए ज्ञापन में कहा गया कि नितेश राणे ने एक सार्वजनिक मंच से AIMIM को “टेररिस्ट ऑर्गेनाइजेशन” (आतंकवादी संगठन) कहा और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद असदुद्दीन ओवैसी की तुलना अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी ओसामा बिन लादेन से करते हुए उन्हें “आतंकवादियों का सरदार” बताया। ‘फ्री प्रेस जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार, राणे ने यह भी दावा किया कि AIMIM और प्रतिबंधित संगठन PFI में कोई अंतर नहीं है और इस पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
भड़काऊ भाषा पर भड़का गुस्सा
जिला अध्यक्ष निशात अली ने कहा कि जब कोई संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति निर्वाचन आयोग से मान्यता प्राप्त दल को आतंकवादी संगठन कहता है, तो यह सिर्फ एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि देश के करोड़ों मतदाताओं, चुनाव आयोग और भारतीय संविधान का खुला अपमान है। AIMIM एक कानून सम्मत पार्टी है जिसके प्रतिनिधि संसद और विधानसभाओं में जनता की आवाज उठाते हैं। ऐसी जहरीली भाषा लोकतंत्र की जड़ों पर प्रहार है।
AIMIM की मुख्य 6 मांगें:
1. **तत्काल FIR:** नितेश राणे के खिलाफ हेट स्पीच (घृणा भाषण) और सामाजिक शांति भंग करने के आरोप में तुरंत एफआईआर दर्ज हो।
2. **कठोर कार्रवाई:** भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत निष्पक्ष जांच कर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
3. **मंत्री पद से बर्खास्तगी:** महाराष्ट्र सरकार को निर्देशित कर नितेश राणे को तुरंत मंत्री पद से हटाया जाए।
4. **चुनाव आयोग की कार्रवाई:** जनप्रतिनिधियों द्वारा भविष्य में ऐसी भाषा के इस्तेमाल को रोकने के लिए चुनाव आयोग सख्त कदम उठाए।
5. **संवैधानिक गरिमा की रक्षा:** देश की सामाजिक एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने के लिए इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप हो।
6. **नजीर बने कार्रवाई:** यदि ऐसे लोगों पर कड़ी और उदाहरणात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो नफरत फैलाने वाली ताकतों के हौसले बुलंद होंगे।
प्रदर्शन में ये पदाधिकारी रहे मौजूद
इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान मुख्य रूप से मेराज चौधरी, नईम अख्तर अंसारी, हिदायतउल्लाह शम्सी, इरफ़ान अहमद, रिजवान जफ़रुल्लाह, अताउल्लाह चौधरी, अब्दुल अहद खान, डॉ उबैदउल्लाह हाशमी, शम्स तबरेज खान, इज़हार खान, तनवीर अहमद, हाजी सिराजुद्दीन, सुहेल अहमद, आफताब अहमद, जाहिरुद्दीन, सहज़ाद अहमद, अब्दुल सलाम, नूर आलम, मोहम्मद इस्लाम, अरमान, मोहम्मद अनस सहित भारी संख्या में जिला पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।