📅 Published on: May 25, 2026
**पुलिस विवेचना पर उठाए गंभीर सवाल; मेडिकल रिपोर्ट दबाने और समझौते के लिए दबाव बनाने का आरोप**
निजाम अंसारी / सिद्धार्थनगर।
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में हुए एक कथित जानलेवा हमले के मामले में अब पीड़ित परिवार ने पुलिस की कार्यप्रणाली और विवेचना पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना को लगभग दो महीने बीत जाने के बावजूद मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से नाराज पीड़िता ताहिरा खातून ने आईजी गोरखपुर और पुलिस अधीक्षक (SP) सिद्धार्थनगर को प्रार्थना पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
**क्या है पूरा मामला?**
पीड़िता ताहिरा खातून के अनुसार, यह विवाद **27 मार्च 2026** को शुरू हुआ था। गांव में हुए आपसी विवाद के दौरान दबंगों ने उसके पति शमशाद और बेटे तवरेज पर धारदार हथियार, लोहे की रॉड और लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया था। इस हमले में पिता-पुत्र दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे। आरोप है कि हमलावरों ने घटना के वक्त उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी थी।
**केस डायरी से मेडिकल रिपोर्ट गायब करने का आरोप**
पीड़ित परिवार का आरोप है कि स्थानीय पुलिस इस मामले में ढुलमुल रवैया अपना रही है। आवेदन में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि:
* घायलों की **मेडिकल रिपोर्ट और अस्पताल से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों** को जानबूझकर समय पर केस डायरी (CD) का हिस्सा नहीं बनाया गया।
* पीड़ित पक्ष को अंदेशा है कि ऐसा आरोपियों को कानूनी लाभ पहुंचाने की नीयत से किया गया।
* जब अदालत में सुनवाई के दौरान इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया गया, तब जाकर कोर्ट के आदेश पर संबंधित रिपोर्ट तलब की गई।
**पीड़िता का बयान:** “हमारे द्वारा दिए गए शपथ पत्र और कई महत्वपूर्ण तथ्यों को विवेचक ने जांच में शामिल ही नहीं किया। नामजद आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और हम पर लगातार केस में समझौते का दबाव बनाया जा रहा है।”
**पुलिस अधीक्षक ने दिया आश्वासन**
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर ने पीड़िता के आवेदन पर संज्ञान लिया है। सूत्रों के मुताबिक, एसपी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस आश्वासन के बाद पीड़ित परिवार को न्याय की कुछ उम्मीद जगी है, हालांकि अभी तक पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है।
स्थानीय इलाके में इस घटना को लेकर तनाव और चर्चाओं का माहौल गर्म है। ग्रामीण भी पीड़ित परिवार के समर्थन में हैं और दोषियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह है कि उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद जांच क्या मोड़ लेती है।