**सड़क बनी पर सिर उठा रही मौत: सिद्धार्थनगर में नई बनी सड़क के बीच खड़े बिजली के खंभे दे रहे बड़े हादसे को न्योता**

गुरु जी की कलम से
**सिद्धार्थनगर।** विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल तब खुल जाती है, जब सार्वजनिक धन से तैयार हुई नई सड़क ही लोगों की जान की दुश्मन बन जाए। बांसी-जिगिनिहवा से चेतिया मार्ग होते हुए होरिलापुर तक बनी पक्की सड़क इसका जीवंत उदाहरण है। मधवापुर कला से होरिलापुर के बीच सड़क के ठीक बीचों-बीच खड़े बिजली के खंभे हर गुजरते वाहन चालक के लिए किसी ‘काल’ से कम नहीं हैं। सड़क निर्माण को एक साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन न तो लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की नींद खुली और न ही विद्युत विभाग ने इस ओर ध्यान देना मुनासिब समझा। सवाल यह उठता है कि क्या जिम्मेदार विभाग किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहे हैं?
**अंधेरे और बारिश में ‘डेथ ट्रैप’ बनते खंभे**
स्थानीय निवासियों का कहना है कि रात के अंधेरे और बारिश के मौसम में यह स्थिति और भयावह हो जाती है। सड़क के बीच में खड़े ये पोल दिखाई नहीं देते, जिससे आए दिन वाहन चालक इनसे टकराने से बाल-बाल बचते हैं। करोड़ों रुपये खर्च करके सड़क बनाने का भला क्या औचित्य, जब उस पर चलना ही सुरक्षित न हो? विभागीय लापरवाही और मौन कार्यप्रणाली यह साफ दर्शाती है कि आम जनता की सुरक्षा अधिकारियों के लिए कोई प्राथमिकता नहीं है।
**जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने की सख्त कार्रवाई की मांग**
होरिलापुर के ग्राम प्रधान अजहरुद्दीन, मधवापुर कला के प्रधान प्रतिनिधि अब्दुल मोईद और रतनपुर के प्रधान प्रतिनिधि प्रेम सेवक समेत दर्जनों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी, पीडब्ल्यूडी और विद्युत विभाग के उच्च अधिकारियों को पत्र सौंपकर इन बिजली के खंभों को तत्काल स्थानांतरित करने की मांग की है। ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इन खंभों को नहीं हटाया गया और कोई भी अप्रिय घटना घटी, तो उसकी पूरी जवाबदेही संबंधित विभागों की होगी।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या पर समय रहते संज्ञान लेता है या फिर किसी मासूम की जान जाने के बाद ही कागजी जांच का दौर शुरू होगा।