ग्राउंड रिपोर्ट: प्लास्टिक के दौर में ‘मेटल कंटेनर’ की बंदिश, जिलाधिकारी के आदेश से किसान परेशान!

Kapilvastupost
जनपद समाचार
जनपद में कृषि कार्य के लिए डीजल खरीद को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही अफवाहों पर विराम लगाते हुए जिलाधिकारी श्री शिवशरणप्पा जी एन ने स्थिति स्पष्ट की है। हालांकि, प्रशासन के इस स्पष्टीकरण ने किसानों के सामने एक नया व्यावहारिक संकट खड़ा कर दिया है।
प्रशासन का कहना है कि जनपद में डीजल की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति सुचारू रूप से जारी है। लेकिन, सुरक्षा मानकों का हवाला देते हुए अब प्लास्टिक के गैलन में डीजल देने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। नए नियमों के मुताबिक, किसानों को केवल **PESO (Petroleum and Explosives Safety Organization) अप्रूव्ड** यानी मुख्य रूप से धातु (मेटल) से बने सुरक्षित कंटेनरों में ही डीजल दिया जाएगा।
**३० साल पुरानी आदत और बाजार की हकीकत: कैसे बदलेगी व्यवस्था?**
प्रशासन का यह फैसला सुरक्षा के लिहाज से भले ही सही हो, लेकिन धरातल पर यह किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। पिछले करीब तीन दशकों (३० साल) से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में प्लास्टिक के गैलन, ड्रम और कुर्सियों जैसी दैनिक उपयोग की चीजों का बोलबाला रहा है। हलके, सस्ते और आसानी से मिलने वाले प्लास्टिक गैलन ही किसानों के लिए खेतों तक डीजल ले जाने का एकमात्र जरिया रहे हैं।
अचानक आए इस आदेश के बाद आम जनता और किसानों के सामने कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं:
बाजार से गायब हैं मेटल के गैलन:** स्थानीय बाजारों में लोहे या टीन (धातु) के प्रमाणित गैलन आसानी से उपलब्ध ही नहीं हैं। ऐसे में किसान नया कंटेनर कहाँ से लाएं?
*आर्थिक बोझ:** यदि बाजार में मेटल के कंटेनर मिलते भी हैं, तो उनकी कीमत प्लास्टिक के मुकाबले कई गुना ज्यादा होगी, जिससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
**व्यावहारिक कठिनाई:** लोहे के भारी कंटेनरों को खेतों तक ले जाना और उनका रखरखाव करना प्लास्टिक की तुलना में काफी मुश्किल है।
**अफवाहों से बचें, लेकिन समस्याओं का हल कौन निकालेगा?**
जिलाधिकारी ने आम जनता और किसानों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक खबरों या अफवाहों पर ध्यान न दें और कृषि कार्य के लिए सुरक्षित धातु के कंटेनरों का ही उपयोग करें।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब बाजार में विकल्प (मेटल कंटेनर) मौजूद ही नहीं हैं, तो किसान इस नियम का पालन कैसे करें? इस तुगलकी असमंजस के बीच, खेती के पीक सीजन में किसानों को डीजल के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
**किसानों की मांग:** स्थानीय किसान संगठनों का कहना है कि प्रशासन को इस नियम को कड़ाई से लागू करने से पहले बाजारों में उचित मूल्य पर PESO अप्रूव्ड मेटल कंटेनर उपलब्ध कराने की व्यवस्था करनी चाहिए थी, ताकि खेती का काम प्रभावित न हो।