📅 Published on: June 18, 2026
**सिद्धार्थनगर: जमीनी हकीकत से कोसों दूर अधिकारियों की आईजीआरएस रिपोर्ट, स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश**
निजाम अंसारी
**सिद्धार्थनगर।**
देश को खुले में शौच से मुक्त करने और नागरिकों को बेहतर स्वच्छता सुविधाएं देने के उद्देश्य से शुरू किया गया ‘स्वच्छ भारत मिशन’ उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में सरकारी दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है। जिले के नगर पंचायत बिस्कोहर के विश्वनाथ नगर में बना करोड़ों की लागत का सार्वजनिक शौचालय बुनियादी सुविधाओं के अभाव में खुद ‘बदहाली का शिकार’ हो चुका है।
**भवन तैयार, लेकिन पानी गायब: राहगीर और स्थानीय लोग परेशान**
विश्वनाथ नगर स्थित इस सार्वजनिक शौचालय का भवन तो चमचमाता हुआ खड़ा कर दिया गया है, लेकिन इसके संचालन के लिए सबसे महत्वपूर्ण ‘पानी’ की व्यवस्था करना प्रशासन भूल गया। स्थिति यह है कि शौचालय का उपयोग करने आने वाले राहगीरों और नागरिकों को या तो अपने साथ पानी लेकर जाना पड़ता है या फिर आसपास की दुकानों से मांगकर काम चलाना पड़ता है। ऐसे में यह शौचालय आम जनता के लिए सुविधा कम और दुविधा ज्यादा साबित हो रहा है।
**मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर फर्जीवाड़ा?**
इस गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय निवासी प्रभात जायसवाल ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) पर शिकायत दर्ज कराई थी ताकि शासन स्तर से इस पर कार्रवाई हो सके। लेकिन, शिकायतकर्ता का आरोप है कि नगर पंचायत प्रशासन ने मौके पर जाकर समस्या का समाधान करने के बजाय दफ्तर में बैठकर ही कागजी घोड़े दौड़ा दिए।
आरोप है कि नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी (EO) अखिलेश दीक्षित की ओर से पोर्टल पर समस्या के निस्तारण की जो रिपोर्ट लगाई गई है, वह जमीनी हकीकत से बिल्कुल उलट है। बिना पानी की व्यवस्था सुनिश्चित किए ही शिकायत को क्लोज (निस्तारित) कर दिया गया।
**”शौचालय में पानी जैसी बुनियादी सुविधा ही नहीं है, तो उसे चालू मानकर रिपोर्ट कैसे लगा दी गई? यह सीधे तौर पर शासन की आंखों में धूल झोंकने जैसा है।” प्रभात जायसवाल, शिकायतकर्ता*
**निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग**
शिकायतकर्ता और स्थानीय निवासियों ने अब जिला प्रशासन और उच्चाधिकारियों से मांग की है कि:
* इस पूरे मामले की निष्पक्ष जमीनी जांच कराई जाए।
* आईजीआरएस पोर्टल पर गलत आख्या (रिपोर्ट) लगाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
* शौचालय में तत्काल प्रभाव से पानी की बोरिंग और टंकी की व्यवस्था कर इसे सुचारू रूप से संचालित किया जाए।
अब देखना यह होगा कि स्वच्छ भारत मिशन का मखौल उड़ाने वाले इस ढर्रे पर जिले के आला अधिकारी क्या संज्ञान लेते हैं या फिर बिस्कोहर की जनता बूंद-बूंद पानी के लिए ऐसे ही तरसती रहेगी।