📅 Published on: July 9, 2026
*शिक्षा मंत्रालय की 9 सदस्यीय समिति की ऐतिहासिक सिफारिश; किसी एक परीक्षा के अत्यधिक तनाव से मिलेगी मुक्ति, सीबीएसई प्रिंसिपल ने कहा- “यह एक मानवीय और सकारात्मक बदलाव की नई सुबह है।”* ए के भारद्वाज प्रिंसिपल गंगा नेशनल पब्लिक स्कूल
परमात्मा उपाध्याय की रिपोर्ट
नई दिल्ली (विशेष ब्यूरो): देश की सबसे प्रतिष्ठित और तनावभरी प्रवेश परीक्षाओं—नीट (NEET) और जेईई (JEE)—की तैयारी करने वाले लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आ रही है। केंद्र सरकार अब एक ऐसे ऐतिहासिक बदलाव पर गंभीरता से विचार कर रही है, जो छात्रों के कंधों से ‘करो या मरो’ वाली परीक्षा का भारी बोझ हमेशा के लिए कम कर सकता है। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, अब मेडिकल और इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए केवल प्रवेश परीक्षा के अंक ही काफी नहीं होंगे, बल्कि 12वीं बोर्ड परीक्षा के अंकों को भी 50 प्रतिशत का बड़ा वेटेज (महत्व) दिया जा सकता है।
इस व्यापक बदलाव के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य किसी एक परीक्षा के कारण छात्रों में उत्पन्न होने वाले अत्यधिक मानसिक तनाव को कम करना है। हाल के दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों से पेपर लीक और मूल्यांकन में गड़बड़ियों जैसी घटनाओं ने राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की साख पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इन कमियों को पूरी तरह सुधारने और छात्रों को कोचिंग सेंटरों के जाल से मुक्ति दिलाने के लिए शिक्षा मंत्रालय की नौ सदस्यीय समिति गहराई से मंथन कर रही है।
**डमी स्कूलों के बढ़ते चलन पर लगेगी लगाम**
समिति का दृढ़ता से मानना है कि बोर्ड परीक्षाओं को पुनः महत्व देने से देश में तेजी से पैर पसार रहे ‘डमी स्कूलों’ के बढ़ते चलन पर प्रभावी रोक लगेगी। छात्र अब अपनी स्कूली पढ़ाई को पूरी गंभीरता से लेंगे और रोजाना कक्षाओं में उपस्थित होंगे। इससे न केवल छात्रों का बुनियादी आधार मजबूत होगा, बल्कि अभिभावकों को भी महंगी कोचिंग फीस से बड़ी राहत मिलेगी।
उच्च शिक्षा को लेकर शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के इस कदम को लेकर जनपद स्थित सीबीएसई बेस्ड स्कूल गंगा नेशनल पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल का दृष्टिकोण**
इस ऐतिहासिक फैसले के व्यावहारिक पहलुओं को समझने के लिए रिपोर्टर ने एक प्रतिष्ठित सीबीएसई स्कूल के प्रिंसिपल से बात की। उनके साथ हुए सवाल-जवाब के मुख्य अंश नीचे दिए गए हैं:
**सवाल: इस नए सिस्टम (50% बोर्ड वेटेज) से छात्रों को तनाव से कितनी राहत मिलेगी?
*प्रिंसिपल ए के भारद्वाज सरकार के इस फैसले पर कहा यह एक बेहद मानवीय कदम है। अभी तक बच्चे केवल एक दिन और तीन घंटे की परीक्षा के दबाव में घुटते थे। बोर्ड के अंकों को 50% वेटेज मिलने से उनका पूरे साल का परिश्रम मायने रखेगा और एक दिन का मानसिक दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा।
**सवाल: क्या इससे वाकई ‘डमी स्कूलों’ की मनमानी और कोचिंग का एकाधिकार खत्म होगा?**
जी बिल्कुल! जब तक बोर्ड के अंकों की कोई अहमियत नहीं थी, तब तक बच्चे स्कूलों से दूर होकर सिर्फ कोचिंग सेंटरों के कमरों में बंद हो गए थे। अब जब 12वीं के मार्क्स सीधे मेरिट तय करेंगे, तो छात्र अपनी स्कूली पढ़ाई को गंभीरता से लेंगे। डमी स्कूलों का धंधा पूरी तरह बंद हो जाएगा।
**सवाल: क्या स्कूल इस नए बदलाव के अनुसार खुद को तैयार कर पाएंगे?**
**प्रिंसिपल:** हमें अपनी शिक्षण शैली को और मजबूत करना होगा। चूंकि सरकार प्रवेश परीक्षाओं के पूरे स्वरूप को स्कूल के पाठ्यक्रम के बिल्कुल अनुकूल बना रही है, इसलिए हमारा ध्यान बोर्ड और कॉम्पिटिशन दोनों की तैयारी को स्कूल के भीतर ही संतुलित करने पर होगा, ताकि बच्चों को बाहर अलग से महंगी कोचिंग न लेनी पड़े।
**’ऑन-डिमांड’ टेस्ट और एक से अधिक प्रयास की सिफारिश**
सूत्रों के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय की यह समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट आने वाले कुछ हफ्तों में सरकार को सौंप सकती है। इस रिपोर्ट में केवल वेटेज ही नहीं, बल्कि प्रवेश परीक्षाओं के पूरे स्वरूप को छात्र-अनुकूल बनाने की बात कही गई है। छात्रों को एक से अधिक प्रयास (Multiple Attempts) देने और धीरे-धीरे ‘आन-डिमांड कंप्यूटर आधारित टेस्ट’ की तरफ बढ़ने की मजबूत सिफारिश की गई है। अगर ये सिफारिशें लागू होती हैं, तो बच्चों का भविष्य सिर्फ तीन घंटे के एक इम्तिहान से तय नहीं होगा।
उन्होंने आगे बताया कि लंबे समय से देश की शिक्षा व्यवस्था को दीमक की तरह चाट रहे ‘डमी स्कूलों’ और कोचिंग सेंटरों के बेकाबू व्यापार पर लगाम लगाने के लिए यह फैसला बेहद जरूरी था।
जब बोर्ड परीक्षा के अंकों की अहमियत लौटेगी, तो छात्र फिर से स्कूल की नियमित कक्षाओं का रुख करेंगे और उनका बुनियादी संज्ञानात्मक विकास बेहतर तरीके से हो सकेगा।
इसके साथ ही छात्रों की ऑनलाइन अटेंडेंस से सोने पर सुहागा हो जाएगा इससे शिक्षा के क्षेत्र में और पारदर्शिता आएगी छात्रों के परिवार वालों पर आर्थिक बोझ बहुत कम हो जाएगा।