📅 Published on: July 11, 2026
गुरू जी की कलम से
**बढ़नी , सिद्धार्थ नगर ।** विकास खंड बढ़नी क्षेत्र की मेसर्स युग कृष्णा गैस एजेंसी की मनमानी और उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी के खिलाफ जिला प्रशासन ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उपभोक्ताओं की ओर से लगातार मिल रही शिकायतों और विभागीय जांच में गंभीर अनियमितताएं उजागर होने के बाद, जिलाधिकारी (डीएम) शिवशरणप्पा जीएन ने इंडियन आयल कारपोरेशन के क्षेत्रीय प्रबंधक (एलपीजी), गोरखपुर को पत्र भेजकर एजेंसी के विरुद्ध नियमानुसार तत्काल दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
जांच में खुली पोल: कागजों पर भरा स्टॉक, गोदाम मिला खाली
आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर क्षेत्र के कई उपभोक्ताओं (जैसे- मंगल विश्वकर्मा, हरिओम चौधरी, ओमप्रकाश, सजरुन्निषा, रघुवेंद्र आदि) ने शिकायत दर्ज कराई थी कि बुकिंग और डीएसी नंबर जारी होने के बावजूद उन्हें गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा था। उपभोक्ताओं के मोबाइल पर फर्जी तरीके से ‘डिलीवरी सफल’ होने का संदेश तो भेज दिया जाता था, लेकिन वास्तव में सिलेंडर की आपूर्ति नहीं की जाती थी।
शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय पूर्ति निरीक्षक बढ़नी और क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी ने संयुक्त जांच की। इस जांच में जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले हैं:
**शून्य मिला भौतिक स्टॉक:** ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार एजेंसी के खाते में 648 घरेलू (14.2 किलोग्राम) भरे हुए गैस सिलेंडर दर्ज मिले। गोदाम में कम से कम 393 भरे सिलेंडर उपलब्ध होने चाहिए थे, लेकिन जब अधिकारियों ने मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया, तो घरेलू गैस सिलेंडरों का स्टॉक पूरी तरह ‘शून्य’ पाया गया।
**दूसरी एजेंसी के सिलेंडर:** जांच में 255 सिलेंडर दूसरी एजेंसी (मेसर्स भार्गव इंडेन गैस सर्विस, पचपेड़वा) के पाए गए।
**जवाब देने में पार्टनर नाकाम:** स्टॉक में इतनी बड़ी हेराफेरी को लेकर जब एजेंसी के सह-पार्टनर रवि प्रकाश से स्पष्टीकरण मांगा गया, तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
22 उपभोक्ताओं ने लिखित बयान देकर खोली पोल
जांच के दौरान 22 उपभोक्ताओं ने अधिकारियों के सामने उपस्थित होकर लिखित बयान दर्ज कराए। उपभोक्ताओं ने गैस एजेंसी की मनमानी को उजागर करते हुए निम्नलिखित गंभीर आरोप लगाए:
* उपभोक्ताओं से निर्धारित सरकारी मूल्य से अधिक धनराशि वसूली जा रही थी।
* एजेंसी द्वारा होम डिलीवरी की कोई सुविधा नहीं दी जा रही थी।
* गैस वितरण के बाद कोई रसीद नहीं दी जाती थी और न ही उपभोक्ता पासबुक पर कोई प्रविष्टि (Entry) की जाती थी।
* कई मामलों में ऑनलाइन भुगतान स्वीकार करने से भी मना किया जाता था।
पहले भी जारी हो चुके हैं दो नोटिस
जिलाधिकारी ने अपने पत्र में स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया है कि इस गैस एजेंसी का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी जिला पूर्ति अधिकारी द्वारा **5 जून** और **27 जून 2026** को एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र भेजे जा चुके हैं।
अब जांच में कुल 7 गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद, डीएम ने इंडियन आयल कारपोरेशन को सख्त निर्देश दिए हैं कि इस एजेंसी के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए ताकि आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जा सके।