📅 Published on: August 12, 2026
बलरामपुर: कम पेट्रोल डालने का विरोध करने पर मौलाना से मारपीट, वायरल वीडियो के बाद 3 आरोपी गिरफ्तार
Kapilvastupostu
गैसड़ी (बलरामपुर): मटेहना स्थित पेट्रोल पंप पर कम पेट्रोल (घतौली) का विरोध करने पर मौलाना अकबाल के साथ हुई बर्बर मारपीट की घटना ने अब एक बड़े प्रशासनिक और तकनीकी भ्रष्टाचार की तरफ इशारा कर दिया है। जहाँ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, वहीं इस पूरे मामले में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के जिम्मेदार अधिकारियों और जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) की भूमिका व रहस्यमयी चुप्पी पर जनता और सामाजिक संगठनों ने तीखे सवाल खड़े किए हैं।
क्या केवल कर्मचारियों पर कार्रवाई काफी है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल दो-चार कर्मचारियों की दबंगई का मामला नहीं है, बल्कि सीधे-सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डालने का एक संगठित खेल है।
बड़ा सवाल: जब कोई उपभोक्ता अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा देकर पूरा ईंधन मांगता है, तो उसे कम पेट्रोल क्यों दिया जाता है? क्या पेट्रोल पंपों पर चिप/सॉफ्टवेयर या नोजल में हेराफेरी करके घटतौली का खेल अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहा है?
IOCL के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा तय हो कार्यवाही
पेट्रोल पंपों की गुणवत्ता, नोजल की सटीकता और मशीनों की रूटीन चेकिंग का जिम्मा तेल कंपनियों के सेल ऑफिसर (Sales Officer) और फील्ड मैनेजरों का होता है।
लापरवाही या शह? IOCL के अधिकारी समय-समय पर पंपों का निरीक्षण करने का दावा करते हैं, तो फिर मटेहना पेट्रोल पंप पर खुलेआम कम पेट्रोल देने का खेल कैसे चल रहा था?
तकनीकी जांच कब होगी? मारपीट की घटना के बाद भी क्या तेल कंपनी की ओर से उक्त पेट्रोल पंप की मशीनों की कैलिब्रेशन और नोजल की सघन जांच की गई?
लाइसेंस पर एक्शन क्यों नहीं? उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी और मारपीट जैसे गंभीर मामले के बाद भी कंपनी ने पेट्रोल पंप के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई या सीलिंग की प्रक्रिया शुरू क्यों नहीं की?
जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) की कार्यशैली पर उठे कड़े कमेंट
जिले में राशन व्यवस्था के साथ-साथ पेट्रोल-डीजल की नाप-तौल, ओवरचार्जिंग और कालाबाजारी को रोकने की सीधी जिम्मेदारी जिला पूर्ति विभाग (DSO) और वॉट-माप (Weight & Measurement) विभाग की होती है।
कागजी साबित हो रहे औचक निरीक्षण: जिले के पेट्रोल पंपों पर आए दिन कम तेल मिलने की शिकायतें आती हैं, लेकिन जिला पूर्ति अधिकारी की ओर से ठोस अभियान चलाकर पंपों की जांच नहीं की जाती।
जनता का भरोसा डगमगाया: जब एक नागरिक घटतौली की शिकायत करता है, तो उसे न्याय और सही माप मिलने के बजाय गुंडागर्दी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पूर्ति विभाग का निष्क्रिय बने रहना अधिकारियों की कार्यशैली पर गहरे दाग लगाता है।
कड़ी कार्रवाई का अभाव: घटतौली के मामलों में केवल औपचारिक नोटिस देकर मामला रफा-दफा कर दिया जाता है, जिससे पेट्रोल पंप मालिकों के हौसले बुलंद हैं।
जनता और संगठनों की स्पष्ट मांग
स्थानीय नागरिकों और विभिन्न संगठनों ने मांग की है कि इस मामले में केवल एफआईआर दर्ज करना काफी नहीं है:
पंप सील हो: घटतौली करने वाले और ग्राहक से मारपीट करने वाले पेट्रोल पंप की एनओसी और लाइसेंस को तुरंत निलंबित/रद्द किया जाए।
सघन जांच अभियान चले: IOCL और जिला पूर्ति विभाग की एक संयुक्त टीम जिले के सभी पेट्रोल पंपों की मशीनों और नोजल की औचक जांच करे।
अधिकारियों की जवाबदेही तय हो: जिन अधिकारियों के संरक्षण में क्षेत्र में घटतौली का खेल पनप रहा है, उनके खिलाफ भी प्रशासनिक जांच बैठाई जाए।
अगर समय रहते खाद्य एवं पूर्ति विभाग और IOCL के शीर्ष अधिकारियों ने इस पर कठोर कदम नहीं उठाए, तो उपभोक्ताओं का प्रशासन और तेल कंपनियों पर से विश्वास पूरी तरह उठ जाएगा।