बढ़या PHC के सामने वर्षों से अवैध रूप से संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटर सील, संचालक फरार; खड़े हुए कई गंभीर सवाल, मिलीभगत से और भी हॉस्पिटल हो रहे संचालित

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सिद्धार्थनगर / बढ़या: बढ़या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के ठीक सामने वर्षों से कथित तौर पर बिना किसी वैध पंजीकरण के चल रहे एक अल्ट्रासाउंड सेंटर पर आखिरकार स्वास्थ्य विभाग का डंडा चला है। पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ. मानवेंद्र पाल के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर अचानक छापेमारी की। टीम की आहट मिलते ही सेंटर संचालक पीछे के दरवाजे से रफूचक्कर हो गया।

छापेमारी के दौरान मौके से अल्ट्रासाउंड मशीन, लैपटॉप, प्रिंटर, बिल रजिस्टर, मरीजों की ओपीडी पर्चियां और कई तैयार रिपोर्टें बरामद की गईं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए पूरे सेंटर को सील कर दिया है और बरामद उपकरणों को कब्जे में ले लिया है।

कार्रवाई के बाद उठ रहे बड़े सवाल

भले ही स्वास्थ्य विभाग इस कार्रवाई को अपनी बड़ी उपलब्धि मान रहा हो, लेकिन इस पूरी घटना ने विभागीय कार्यप्रणाली पर कई तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं:

वर्षों तक क्यों बनी रही चुप्पी? यह सेंटर किसी दूर-दराज के इलाके में नहीं, बल्कि सीधे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य गेट के सामने संचालित हो रहा था। इतने लंबे समय तक बिना पंजीकरण के चल रहे इस सेंटर पर पहले नजर क्यों नहीं पड़ी?

अब तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं? सेंटर को सील कर दिया गया और संचालक मौके से भाग निकला, लेकिन घटना के इतने घंटे बीत जाने के बाद भी आरोपी संचालक के खिलाफ संबंधित धाराओं में नामजद एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई गई?

क्या केवल सीलिंग ही काफी है? बिना मान्यता के मरीजों की जांच करना और उनकी सेहत के साथ खिलवाड़ करना एक गंभीर अपराध है। क्या महज सेंटर को सील कर देना ही पर्याप्त कार्रवाई है, या फिर इस फर्जीवाड़े में शामिल जिम्मेदारों और संचालक पर सख्त कानूनी शिकंजा कसा जाएगा?

फिलहाल, इस कार्रवाई के बाद से क्षेत्र के अवैध क्लिनिक और जांच केंद्रों के संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है। अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग केवल सीलिंग तक सीमित रहता है या फिर आरोपी के खिलाफ कड़ी पुलिस कार्रवाई अमल में लाई जाती है।