📅 Published on: August 27, 2026
Editorial
काठमांडू/बीजिंग। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के बड़े हिस्से के टूटने के बाद अचानक नदी में आए मलबे और पानी ने गांवों, सड़कों, पुलों, वाहनों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में मृतकों की संख्या अब करीब 180 तक पहुंच गई है, जबकि 1,300 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। रेस्क्यू अभियान लगातार जारी है और मृतकों तथा लापता लोगों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
नेपाल में 177 लोगों की मौत, 800 से ज्यादा लापता
नेपाल पुलिस के अनुसार अब तक 177 शव बरामद किए जा चुके हैं। नेपाल में 823 लोग अभी भी लापता बताए गए हैं, जिनमें 517 विदेशी नागरिक शामिल हैं। इनमें बड़ी संख्या पर्यटकों और कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों की है।
तिब्बत के ग्यिरोंग क्षेत्र में चीन ने 3 लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि करीब 558 लोग लापता बताए गए हैं। इनमें लगभग 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं। इस तरह दोनों तरफ मिलाकर लापता लोगों की संख्या 1,300 से ऊपर पहुंच गई है।
30 से ज्यादा देशों के नागरिक लापता
नेपाल में लापता पर्यटकों में भारत के नागरिकों की संख्या सबसे अधिक बताई जा रही है। Reuters के अनुसार नेपाल और तिब्बत की घटनाओं में लापता विदेशी नागरिकों में 30 से अधिक देशों के लोग शामिल हैं।
प्रारंभिक देशवार आंकड़े इस प्रकार हैं—
भारत: करीब 177 पर्यटक लापता
अमेरिका: 63
यूक्रेन: 53
मलेशिया: 55 तक
ऑस्ट्रेलिया: 34
ब्रिटेन: 33
कनाडा: 25
जापान: 10 से कम
न्यूजीलैंड: 10 से कम
रूस: 10 से कम
सिंगापुर: 10 से कम
दक्षिण अफ्रीका: 10 से कम
इसके अलावा बेलारूस, बेल्जियम, फिनलैंड, फ्रांस, हंगरी, आयरलैंड, इजरायल, कजाखस्तान, लातविया, लिथुआनिया, नीदरलैंड, फिलीपींस, पुर्तगाल, स्पेन और स्वीडन समेत कई देशों के नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।
महत्वपूर्ण: लापता बताए गए लोगों को मृत नहीं माना गया है। कई लोगों से संपर्क टूट गया है और उनकी वास्तविक स्थिति की पुष्टि के लिए रेस्क्यू एवं पहचान अभियान चल रहा है।
कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों पर सबसे ज्यादा असर
इस आपदा में प्रभावित लोगों में बड़ी संख्या उन यात्रियों की बताई जा रही है जो कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जा रहे थे। इसके अलावा नेपाल के लोकप्रिय ट्रेकिंग और तीर्थ क्षेत्रों में मौजूद विदेशी पर्यटक भी बाढ़ की चपेट में आए हैं।
नेपाल के प्रभावित क्षेत्रों में फंसे यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
कम से कम 65 घायलों का इलाज
बाढ़ और मलबे की चपेट में आने से घायल लोगों को स्थानीय अस्पतालों तथा काठमांडू के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कम से कम 65 घायलों का इलाज चल रहा था। रासुवा समेत सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों से सेना के हेलीकॉप्टरों द्वारा लोगों को निकाला गया।
हालांकि, घायलों का अंतिम आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है, क्योंकि कई प्रभावित इलाकों तक रेस्क्यू टीमों की पहुंच मुश्किल बनी हुई है।
नेपाल सेना और पुलिस ने संभाला मोर्चा
नेपाल में सेना, नेपाल पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। हेलीकॉप्टरों के साथ-साथ भारी मशीनरी और जमीनी रेस्क्यू टीमों की मदद ली जा रही है। कई स्थानों पर सड़क और पुल बह जाने के कारण बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है।
चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान शुरू किया गया है। ग्यिरोंग पोर्ट और आसपास के इलाकों में सड़क, संचार व्यवस्था और दूसरी आधारभूत सुविधाओं को भारी नुकसान हुआ है।
भारत की चिंता बढ़ी, सैकड़ों नागरिकों का पता नहीं
नेपाल में लापता विदेशी नागरिकों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक बताई गई है। अलग-अलग समय पर जारी सूचियों में भारतीय नागरिकों की संख्या 130 से लेकर करीब 177 तक बताई गई है। यह अंतर इस वजह से है कि नेपाल और भारत की एजेंसियां लगातार सूचियों का मिलान कर रही हैं।
भारत सरकार भी नेपाल के अधिकारियों के संपर्क में है और प्रभावित भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाई जा रही है।
भूकंप नहीं, ग्लेशियर टूटने से आई तबाही
शुरुआती घंटों में घटना को लेकर भूकंप की आशंका जताई गई थी, लेकिन बाद के वैज्ञानिक आकलन में संकेत मिला कि मुख्य कारण ग्लेशियर/बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से का टूटकर नदी में गिरना था। इससे अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा नीचे की ओर आया और फ्लैश फ्लड ने तबाही मचा दी।
विशेषज्ञों ने हिमालय में तेजी से हो रहे ग्लेशियर पिघलने और जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी घटनाओं के बढ़ते खतरे पर भी चिंता जताई है।
रेस्क्यू अभियान जारी, मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका
बाढ़ प्रभावित इलाकों में अभी भी बड़ी संख्या में लोग संपर्क से बाहर हैं। कई गांवों और सड़क मार्गों के क्षतिग्रस्त होने से राहत एवं बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। अधिकारी लगातार लापता लोगों की सूची अपडेट कर रहे हैं और मलबे में फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।
27 अगस्त 2026 तक की स्थिति में नेपाल-तिब्बत आपदा में करीब 180 लोगों की मौत और 1,300 से अधिक लोगों के लापता होने की पुष्टि/रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि यह आंकड़ा अंतिम नहीं है और रेस्क्यू अभियान पूरा होने के बाद वास्तविक संख्या और अधिक हो सकती है।