सिद्धार्थनगर में खाकी पर लगा दाग: 30 हजार रुपये घूस लेने का आरोप, पुलिस बोली- ’46वां एनकाउंटर तुम्हारा ही होगा’ ​इंसाफ की जगह वसूली का केंद्र बनती व्यवस्था

जनता की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी जिस पुलिस पर है, उसी पर जब सौदेबाजी का ठप्पा लगने लगे, तो आम नागरिक का कानून पर से भरोसा उठना तय है। अरमान पुत्र इजहार के मामले में उठ रहे आरोपों ने यह साबित कर दिया है कि निष्पक्ष जांच और कानून का पालन करने के बजाय थाने लेन-देन के अड्डे में तब्दील हो रहे हैं। आरोप है कि युवक को फेसबुक पर गलत कमेंट करने के मामले में थाने में बिठाया गया और उसकी रिहाई के लिए खुलेआम घूस की मांग की गई।

युवक अरमान पुत्र इजहार के परिजनों से रिश्वत मांगने का मामला वायरल है। हालांकि सी ओ मयंक दिवेदी ने जांच के दौरान आरोपों को निराधार बताया ।

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सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के मोहाना थाना क्षेत्र से खाकी को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां पुलिस पर एक गरीब व्यक्ति को थाने लाकर परिजनों से कथित तौर पर एक लाख रुपये की रंगदारी मांगने और पैसे न देने पर फर्जी एनकाउंटर में मार गिराने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगा है।

1 लाख से शुरू हुई डील, 30 हजार पर बनी बात पीड़ित सुग्रीव यादव के परिजनों का कहना है कि पुलिसकर्मी उसे बिना किसी स्पष्ट कारण के थाने उठा लाए। इसके बाद छोड़ने के एवज में परिजनों से एक लाख रुपये की मांग की गई। जब लाचार परिवार ने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई, तो सौदा घटकर 50 हजार और फिर अंत में 30 हजार रुपये पर तय हुआ।

सीओ के आश्वासन के बाद भी वसूली का दावा मामले की भनक लगते ही परिजनों और स्थानीय मीडिया ने क्षेत्राधिकारी (सीओ) से संपर्क किया। सीओ ने निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन आरोप है कि पुलिसकर्मियों पर इसका कोई असर नहीं हुआ। परिजनों का दावा है कि सीओ की मध्यस्थता की जानकारी मिलने के बाद भी दरोगा और सिपाहियों ने कथित तौर पर 30 हजार रुपये ऐंठ लिए और रात करीब 9 बजे सुग्रीव को छोड़ा। इतना ही नहीं, सुग्रीव को छोड़ने से पहले दबाव बनाकर उसके परिवार का एक वीडियो भी बनवाया गया।

‘बस्ती में 45 किए थे, 46वां तुम्हारा होगा’ थाने से छूटने के बाद पीड़ित सुग्रीव यादव ने एक वीडियो जारी कर अपना दर्द बयां किया। पीड़ित के अनुसार, एक दरोगा ने उसे धमकी देते हुए कहा, “बस्ती में 45 एनकाउंटर किया था, मोहाना में 46वां एनकाउंटर तुम्हारा ही होगा।” इस सनसनीखेज बयान के बाद से इलाके में हड़कंप मच गया है।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल इस पूरी घटना के सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन की साख दांव पर लग गई है:

  • सुग्रीव यादव को किस जुर्म या आधार पर थाने लाया गया था?

  • यदि आरोप सही हैं, तो सीओ के संज्ञान में मामला आने के बाद भी रिश्वत लेने की हिम्मत किसने की?

  • क्या खाकी के संरक्षण में गरीबों को एनकाउंटर का डर दिखाकर उगाही की जा रही है?

पीड़ित ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और उन्हें तत्काल लाइन हाजिर करने की मांग की है। हालांकि, इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। पुलिस के उच्च अधिकारियों की आधिकारिक जांच रिपोर्ट के बाद ही मामले का पूरा सच सामने आ सकेगा।

इंसाफ की जगह वसूली का केंद्र बनती व्यवस्था

जनता की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी जिस पुलिस पर है, उसी पर जब सौदेबाजी का ठप्पा लगने लगे, तो आम नागरिक का कानून पर से भरोसा उठना तय है। अरमान पुत्र इजहार के मामले में उठ रहे आरोपों ने यह साबित कर दिया है कि निष्पक्ष जांच और कानून का पालन करने के बजाय थाने लेन-देन के अड्डे में तब्दील हो रहे हैं। आरोप है कि युवक को बेवजह थाने में बिठाया गया और उसकी रिहाई के लिए खुलेआम घूस की मांग की गई।

सोशल मीडिया पर किरकिरी, पुलिस की साख दांव पर

मामला सार्वजनिक होते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने शोहरतगढ़ पुलिस की कार्यशैली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यूजर्स लगातार सवाल पूछ रहे हैं कि क्या अब निर्दोषों को छोड़ना और दोषियों पर कार्रवाई करना कानून के हिसाब से नहीं, बल्कि जेब के वजन से तय होता है? इंटरनेट मीडिया पर उठ रहे इस बवंडर ने पुलिस महकमे की छवि को भारी ठेस पहुंचाई है।